गाजीपुर
तहसीलदार के आदेश के बाद भी ग्रामसभा भूमि पर कब्जा बरकरार, कार्रवाई पर उठे सवाल
बेदखली और अर्थदंड के आदेश के बावजूद नहीं हट सका अतिक्रमण, ग्रामीणों में नाराजगी
जखनियां (गाजीपुर)। तहसील जखनियां क्षेत्र के फौलादपुर गांव में ग्रामसभा की भूमि पर अवैध कब्जे के मामले में तहसीलदार न्यायालय द्वारा बेदखली और अर्थदंड का आदेश पारित किए जाने के बावजूद अतिक्रमण न हटने से प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े होने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि न्यायालय के आदेश के काफी समय बाद भी संबंधित भूमि कब्जामुक्त नहीं कराई जा सकी है।
राजस्व अभिलेखों में प्रमाणित हुआ था अवैध कब्जा
जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के अंतर्गत वाद संख्या 2130/2024 में तहसीलदार जखनियां ने 29 अगस्त 2024 को निर्णय सुनाते हुए ग्रामसभा की खलिहान दर्ज आराजी संख्या 149, रकबा 0.2320 हेक्टेयर भूमि पर किए गए अवैध कब्जे को प्रमाणित माना था।
जांच के दौरान लेखपाल की रिपोर्ट, खतौनी, खसरा तथा अन्य राजस्व अभिलेखों के आधार पर यह पाया गया कि एक व्यक्ति द्वारा लगभग 0.019 हेक्टेयर ग्रामसभा भूमि पर पक्की दीवार और ट्यूबवेल का निर्माण कर कब्जा किया गया था।
न्यायालय ने दिया था बेदखली और अर्थदंड का आदेश
तहसीलदार न्यायालय ने अपने आदेश में कब्जाधारी को ग्रामसभा की भूमि से बेदखल करने, अवैध निर्माण हटाने तथा ₹2.13 लाख से अधिक की क्षतिपूर्ति एवं अर्थदंड की वसूली करने का निर्देश दिया था। साथ ही संबंधित राजस्व अधिकारियों को आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया था।
आदेश के बावजूद कब्जा न हटने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद आज तक भूमि को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया है। उनका कहना है कि संबंधित व्यक्ति अब भी ग्रामसभा की भूमि पर कब्जा बनाए हुए है। इसके अलावा सरकारी नाली की भूमि पर भी अतिक्रमण कर खेती किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
इस स्थिति को लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है और वे प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
शासन की मंशा पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि प्रदेश सरकार लगातार सरकारी एवं ग्रामसभा की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के निर्देश जारी कर रही है। ऐसे में न्यायालय के आदेश के बाद भी कार्रवाई न होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
लोगों की निगाहें अब प्रशासन पर टिकी हैं कि वह शासन की मंशा के अनुरूप आदेश का पालन कराते हुए ग्रामसभा की भूमि को कब्जामुक्त कराता है या नहीं।
प्रशासन ने कार्रवाई का दिया भरोसा
इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि ग्रामसभा और सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है तथा ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। अब देखना होगा कि तहसीलदार न्यायालय के आदेश के अनुपालन में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और ग्रामसभा की भूमि कब तक अतिक्रमण मुक्त हो पाती है।
