गोरखपुर
टीबी उन्मूलन में उत्तर प्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य
एम्स गोरखपुर में तकनीकी संगोष्ठी आयोजित
‘नवाचार, प्रौद्योगिकी, साझेदारी और जनभागीदारी ही टीबी मुक्त यूपी की नींव’ : अमित कुमार घोष
गोरखपुर। एम्स गोरखपुर में प्रदेश में टीबी उन्मूलन की दिशा में प्रगति की समीक्षा और भविष्य की रणनीति तय करने के उद्देश्य से एक दिवसीय तकनीकी संगोष्ठी (टेक्निकल कॉन्क्लेव) का आयोजन किया गया। इसमें राज्य स्वास्थ्य विभाग, राज्य क्षय रोग (टीबी) कार्यालय, चिकित्सकों, निजी स्वास्थ्य क्षेत्र, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों एवं सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित 60 से अधिक विशेषज्ञों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा) अमित कुमार घोष (आईएएस) ने कहा कि “नवाचार, प्रौद्योगिकी, साझेदारी और जनभागीदारी उत्तर प्रदेश की टीबी उन्मूलन यात्रा के मूल आधार हैं।” उन्होंने कहा कि अब केवल लक्षण आधारित जांच नहीं, बल्कि शीघ्र पहचान, शीघ्र निदान, शीघ्र उपचार और जोखिम आधारित सक्रिय सर्विलांस को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है।
एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता (सेवानिवृत्त) ने कहा कि संस्थान राज्य सरकार के साथ टीबी उन्मूलन अभियान में पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि एम्स अपनी आधुनिक चिकित्सा सेवाओं और अनुसंधान क्षमता के माध्यम से रोग की शीघ्र पहचान, बेहतर उपचार और उत्कृष्ट स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने में निरंतर सहयोग देता रहेगा।
संगोष्ठी के दौरान निदान, उपचार, निजी क्षेत्र की सहभागिता और सामुदायिक जनभागीदारी जैसे चार प्रमुख विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन चर्चाओं से प्राप्त सुझावों को राज्य की आगामी कार्ययोजना में शामिल किए जाने पर बल दिया गया।
कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. राजेंद्र प्रसाद, केजीएमयू लखनऊ के श्वसन रोग विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सूर्यकांत त्रिपाठी सहित देशभर के वरिष्ठ चिकित्सकों, शोधकर्ताओं एवं जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।
टीबी मुक्त भारत अभियान में यूपी का शानदार प्रदर्शन
संगोष्ठी में बताया गया कि 100-दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत उत्तर प्रदेश ने देश में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। अभियान के दौरान—
- 31 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई।
- 1.85 लाख नए टीबी मरीजों की पहचान हुई।
- करीब 52 हजार बिना लक्षण वाले (Asymptomatic) टीबी रोगियों का भी पता लगाया गया।
- 26,722 उच्च जोखिम वाले गांवों में से 25,073 गांव (94%) अभियान के तहत कवर किए गए।
- 308 एआई आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों से 30.4 लाख छाती के एक्स-रे किए गए, जो निर्धारित लक्ष्य का 111 प्रतिशत रहा।
- 1,414 अपफ्रंट NAAT जांच केंद्रों के माध्यम से 8.19 लाख पंजीकृत व्यक्तियों में से 7.52 लाख (92%) की जांच पूरी की गई।
संयुक्त निदेशक (टीबी) एवं राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. ऋषि कुमार सक्सेना ने बताया कि जनवरी से जून 2026 के बीच प्रदेश में 3.37 लाख टीबी रोगियों की अधिसूचना दर्ज की गई, जो वार्षिक लक्ष्य का 48 प्रतिशत तथा निर्धारित आनुपातिक लक्ष्य का 96 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रभावी निगरानी व्यवस्था, सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवाओं और व्यापक जनभागीदारी का परिणाम है।
