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गाजीपुर

कर्बला के मैदान में खाली झूले की तड़प

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हज़रत अली असगर की प्यास और शहादत की दर्दनाक दास्तान

बहरियाबाद (गाजीपुर)। कर्बला का इतिहास केवल एक युद्ध की कहानी नहीं, बल्कि सब्र, कुर्बानी, बेबसी और एक मां के अटूट प्रेम की ऐसी दास्तान है, जो आज भी लोगों की आंखें नम कर देती है। इस इतिहास का सबसे मार्मिक अध्याय हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) के छह माह के मासूम बेटे हज़रत अली असगर (अ.स.) की प्यास और शहादत से जुड़ा है।

तीन दिन की प्यास और मासूम की तड़प

मुहर्रम की 10वीं तारीख (आशूरा) को कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन (अ.स.) के अधिकांश साथी शहीद हो चुके थे। यजीदी सेना ने खेमों तक पानी पहुंचने का रास्ता बंद कर दिया था। तीन दिनों की भीषण प्यास से पूरा काफिला व्याकुल था।

हज़रत अली असगर (अ.स.) प्यास से तड़पते थे तो उनकी मां बीबी रबाब उन्हें छोटे से झूले में सुलाकर झुलातीं और अल्लाह से रहमत की दुआ करतीं। लेकिन हालात लगातार कठिन होते जा रहे थे।

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पानी की गुहार और क्रूरता की इंतहा

जब प्यास के कारण मासूम की हालत नाजुक हो गई, तो इमाम हुसैन (अ.स.) उन्हें गोद में लेकर यजीदी सेना के सामने पहुंचे। उन्होंने कहा कि यदि दुश्मनी उनसे है तो इस मासूम बच्चे का क्या दोष है, उसे पानी दे दिया जाए।

रिवायतों के अनुसार, पानी देने के बजाय यजीदी सेना के तीरंदाज हरमला ने एक तीर चलाया, जो हज़रत अली असगर (अ.स.) के गले में लगा। मासूम ने अपने पिता की गोद में ही दम तोड़ दिया और शहादत का दर्जा पाया।

बीबी रबाब का दर्द और सूना झूला

जब इमाम हुसैन (अ.स.) अपने शहीद बेटे को लेकर खेमे में लौटे, तो वहां मातम छा गया। बीबी रबाब ने अपने जिगर के टुकड़े को उस हालत में देखा तो उनका दुख असहनीय हो गया।

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कर्बला की घटना के बाद जब खेमों को लूटा गया और उनमें आग लगा दी गई, तब अली असगर (अ.स.) का खाली झूला उस त्रासदी का मौन साक्षी बन गया। रिवायतों में वर्णित है कि कैद के दिनों में भी बीबी रबाब अपने मासूम बेटे को याद कर रोती रहती थीं।

आज भी जिंदा है याद-ए-अली असगर

मुहर्रम के दिनों में, विशेषकर 7 और 9 मुहर्रम को, कई स्थानों पर हज़रत अली असगर (अ.स.) की याद में गहवारा (झूला) निकाला जाता है। श्रद्धालु इस झूले के माध्यम से कर्बला की उस दर्दनाक घटना और मासूम की प्यास को याद करते हैं।

कुर्बानी और इंसानियत का प्रतीक

हज़रत अली असगर (अ.स.) का खाली झूला आज भी इंसानियत, सब्र और जुल्म के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। कर्बला की यह घटना लोगों को न्याय, सत्य और मानवता के लिए हर कठिनाई का सामना करने की प्रेरणा देती है।

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