भदोही
इंद्रियों पर विजय से ही मिलती है सफलता : स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती
श्रीमद्भागवत कथा में आत्मसंयम, सत्संग और सदाचार का दिया संदेश
सुरियावां (भदोही)। सुरियावां क्षेत्र के ग्राम तुलापुर बहादुरान (छतमा) में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन कथा व्यास डॉ. स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती (पीठाधीश्वर, शंकर मठ, हावड़ा) ने श्रद्धालुओं को आत्मसंयम, सदाचार और सत्संग का महत्व बताया।
उन्होंने कहा कि जीवन में किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सबसे पहले अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त करना आवश्यक है। इंद्रियों को संयमित रखने के लिए उत्तम संगति, धैर्य और अनुशासित जीवनशैली का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कलियुग में अधिकांश समस्याओं की जड़ कुसंगति और धैर्य का अभाव है।
स्वामी प्रज्ञानानंद सरस्वती ने कहा कि आत्मसंयम की शुरुआत व्यक्ति के अपने आचरण से होती है। मनुष्य को यह ध्यान रखना चाहिए कि वह किस वातावरण में रहता है, क्या भोजन करता है और किन लोगों की संगति करता है। इन बातों का पालन करने वाला व्यक्ति ही अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण प्राप्त कर सकता है और यही मानव जीवन के कल्याण का सच्चा मार्ग है।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भागवत कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
इस अवसर पर कैलाश मिश्रा, राजकिशोर गिरि, उमाशंकर गिरि, विजय राज मिश्रा, बाबूलनाथ मिश्र, प्रभाकर शुक्ला, शिवपूजन मिश्रा, शिवधारा गिरि, नर सिंह बहादुर, वेद प्रकाश गौड़, गुलाब यादव, केशव, शैलेश मिश्रा, विवेक दुबे, गणेश मिश्रा, सोमनाथ पुरी, गणेश चौरसिया, रमेश पांडे, लालजी चौरसिया, सुनील कुमार दुबे, जगदीश गिरि, राजाराम गिरि, लालजी उपाध्याय, अमरनाथ उपाध्याय, गुलाब बिंद सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
