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गोरखपुर

आधी रात से कतार, फिर भी खाली हाथ — गैस संकट पर जनता का आक्रोश, जिम्मेदार कौन?

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गोरखपुर और आसपास जनता को राहत देने के दावे करने वाले अधिकारी और कर्मचारी आज अखबारों के माध्यम से सच छिपाकर लोगों को गुमराह करते नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में गैस की भारी किल्लत ने महामारी जैसी स्थिति पैदा कर दी है। हालत यह है कि आम लोग रात दो बजे से ही गैस एजेंसियों के बाहर लाइन लगाना शुरू कर देते हैं, लेकिन घंटों इंतजार और पूरी रात जागने के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है।

जनता का आरोप है कि वितरण व्यवस्था पर मातहतों का बोलबाला है। नियमों को ताक पर रखकर पहचान, दोस्ती, रिश्तेदारी और सिफारिश के आधार पर गैस सिलेंडर बांटे जा रहे हैं, जबकि असली जरूरतमंद पूरी रात लाइन में खड़े रहने के बावजूद वंचित रह जाते हैं। यह स्थिति आम लोगों के लिए अत्यंत पीड़ादायक और आक्रोशजनक बन चुकी है।

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जनता की मांग है कि प्रशासन तुरंत एक पारदर्शी नियम निर्धारित करे। जो लोग रात भर लाइन में लगने के बाद भी गैस नहीं पा सके, उनका नाम रजिस्टर में दर्ज कर अगले दिन की वितरण प्रणाली में उन्हें प्राथमिकता दी जाए, ताकि दो रातें लगातार जागरण करने की मजबूरी से लोगों को राहत मिल सके।

साथ ही ऐसे मातहतों को तत्काल हटाया जाए जो व्यवस्था को अपनी मनमानी से चला रहे हैं। यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो जनता का आक्रोश कभी भी बड़ा आंदोलन बन सकता है।

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