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वाराणसी

आईएमएस-बीएचयू में भर्ती विवाद के बाद अवैध इंक्रीमेंट का मामला गरमाया

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नर्सिंग स्टाफ को नियम विरुद्ध अतिरिक्त लाभ देने का आरोप, जांच एजेंसियों की पड़ताल तेज

कुलपति से इंक्रीमेंट पर रोक और निष्पक्ष जांच की मांग, चार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

वाराणसी। आईएमएस-बीएचयू में आउटसोर्सिंग भर्ती विवाद के बीच अब नर्सिंग अधिकारियों को कथित रूप से नियमों के विरुद्ध अतिरिक्त इंक्रीमेंट देने का मामला सामने आया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भर्ती नियमों की अनदेखी करते हुए कई नर्सिंग अधिकारियों को दो-दो अतिरिक्त नॉन-एब्जॉर्बेबल इंक्रीमेंट का लाभ प्रदान किया गया। मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों की पूछताछ के बाद नए तथ्य सामने आने का दावा किया जा रहा है। इसके बाद बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी से संबंधित इंक्रीमेंट पर रोक लगाने तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठी है।

निर्धारित पात्रता के बिना दिए गए अतिरिक्त इंक्रीमेंट

शिकायत के अनुसार, बीएचयू में वर्ष 2005 से स्टाफ नर्स भर्ती के लिए बीएससी नर्सिंग की योग्यता अनिवार्य है। नियमों के तहत किसी विशेष ग्रेड में नियुक्त नर्सिंग अधिकारी को निर्धारित शर्तों के अनुरूप ही अधिकतम दो अतिरिक्त नॉन-एब्जॉर्बेबल इंक्रीमेंट दिए जा सकते हैं। आरोप है कि कई मामलों में भर्ती नियमों का पालन किए बिना ही अतिरिक्त वित्तीय लाभ दिया गया, जिससे सरकारी नियमों का उल्लंघन हुआ।

भर्ती प्रक्रिया और नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसियों की पूछताछ में आईएमएस-बीएचयू से जुड़े चार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आई है। इनमें एक तत्कालीन नर्सिंग इंचार्ज तथा केंद्रीय कार्यालय में कार्यरत रहे एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी का नाम शामिल होने की चर्चा है। दिल्ली से आई जांच एजेंसी की फील्ड यूनिट ने कई लोगों से पूछताछ कर भर्ती प्रक्रिया और नियुक्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी जुटाई है।

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बड़ी संख्या में नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती में भूमिका की जांच

जांच के दौरान यह दावा भी सामने आया है कि तत्कालीन नर्सिंग इंचार्ज ने राजस्थान के एक मेडिकल कॉलेज से संपर्क स्थापित कर बड़ी संख्या में नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया में भूमिका निभाई थी। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

पुराने निर्णयों और दस्तावेजों की हो रही पड़ताल

सूत्रों के मुताबिक, जांच में जिन दो वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, उनमें से एक अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि दूसरे अधिकारी वर्तमान में अन्य स्थान पर तैनात हैं। जांच एजेंसियां दोनों अधिकारियों से जुड़े दस्तावेजों और निर्णयों की भी समीक्षा कर रही हैं।

आईएमएस-बीएचयू में 700 से अधिक नर्सिंग अधिकारी कार्यरत

शिकायत में दावा किया गया है कि आईएमएस-बीएचयू में कार्यरत 700 से अधिक नर्सिंग अधिकारियों में आधे से अधिक राजस्थान के विभिन्न संस्थानों से आए हैं। इस विषय को लेकर पूर्व में भी कई शिकायतें की जा चुकी हैं। अब केंद्रीय जांच एजेंसियों की सक्रियता के बाद मामले में नए खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

जांच रिपोर्ट पर टिकीं निगाहें

फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से भी इस नए आरोप पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की निगाहें केंद्रीय जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि भर्ती और इंक्रीमेंट से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।

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