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गोरखपुर

अपराधियों की ‘कुंडली’ अपडेट: गोरखपुर पुलिस ने 5,371 पुराने बदमाशों का सत्यापन शुरू किया

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28 थानों की सूची तैयार, गोरखनाथ सर्किल में सबसे अधिक 821 अपराधी

पुराने अपराधियों की गतिविधियों पर पुलिस की नजर

गोरखपुर। जिले में अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पुलिस प्रशासन ने पुराने अपराधियों की मौजूदा गतिविधियों का सत्यापन शुरू कर दिया है। एसएसपी के निर्देश पर 1 जनवरी 2021 से 15 अगस्त 2026 तक के आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर जिले के 28 थानों के 5,371 पुराने बदमाशों की थानेवार सूची तैयार की गई है।

घर-घर पहुंचकर किया जा रहा सत्यापन

संबंधित थाना प्रभारियों की निगरानी में बीट सिपाही और हलका दरोगा सूची में शामिल सभी लोगों के घर-घर पहुंचकर सत्यापन कर रहे हैं। पुलिस उनके वर्तमान कामकाज, आजीविका के साधन, रहन-सहन और मौजूदा गतिविधियों की जानकारी जुटाकर रिकॉर्ड को अपडेट कर रही है।

रोजगार और आजीविका की हो रही पड़ताल

सत्यापन अभियान के दौरान पुलिस यह भी पता कर रही है कि पुराने आरोपी वर्तमान में नौकरी, कारोबार, खेती या मजदूरी के जरिए सामान्य जीवन बिता रहे हैं या फिर दोबारा आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय हो चुके हैं। इसके आधार पर संबंधित व्यक्तियों की वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण तैयार किया जा रहा है।

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संदिग्ध गतिविधियों पर बढ़ेगी सख्त निगरानी

पुलिस पुराने साथियों से संपर्क, संदिग्ध गतिविधियों अथवा दोबारा अपराध की ओर झुकाव जैसे संकेतों की भी पड़ताल कर रही है। यदि किसी व्यक्ति के फिर से आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने या अपराध की तैयारी के संकेत मिलते हैं तो उसकी गतिविधियों पर विशेष और सख्त निगरानी रखी जाएगी।

गोरखनाथ सर्किल में सबसे अधिक 821 नाम

पुलिस के आंकड़ों के अनुसार गोरखनाथ सर्किल पुराने अपराधियों की संख्या के मामले में सबसे ऊपर है। गोरखनाथ, शाहपुर और गुलरिहा थाना क्षेत्रों को मिलाकर यहां 821 नाम सूची में शामिल हैं। पुलिस इन सभी का सत्यापन कर उनकी वर्तमान गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है।

अपराधियों की बदली स्थिति के अनुसार होगा रिकॉर्ड अपडेट

पुलिस का उद्देश्य पुराने अपराधियों की मौजूदा स्थिति का सटीक रिकॉर्ड तैयार करना है, ताकि अपराध नियंत्रण की रणनीति को और प्रभावी बनाया जा सके। सत्यापन के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन सामान्य जीवन जी रहा है और किन लोगों पर दोबारा अपराध में शामिल होने की आशंका के चलते विशेष निगरानी की आवश्यकता है।

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