चन्दौली
चकिया की राजनीति का एक युग हुआ समाप्त
दो बार विधायक रहे राजेश बहेलिया के निधन से शोक में डूबा क्षेत्र, सादगी और ईमानदारी की राजनीति की छोड़ी अमिट छाप
चकिया की राजनीतिक धरती पर छाया शोक
चकिया, (चन्दौली)। जनसेवा, सादगी और ईमानदारी की मिसाल रहे पूर्व विधायक राजेश बहेलिया के निधन से पूरे चकिया क्षेत्र में शोक की लहर है। उनका निधन केवल एक पूर्व जनप्रतिनिधि का जाना नहीं, बल्कि चकिया की राजनीति के उस दौर का अवसान माना जा रहा है, जिसकी बुनियाद सत्यनिष्ठा, संघर्ष और जनकल्याण पर टिकी थी।
1991 और 1993 में लगातार दो बार बने विधायक
राजेश बहेलिया ने वर्ष 1991 और 1993 में लगातार दो बार चकिया सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। विधायक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने राजनीति को कभी सत्ता, संपत्ति और वैभव का माध्यम नहीं बनाया। उनका मानना था कि जनप्रतिनिधि का वास्तविक दायित्व जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करना है।
विधायक बनने के बाद भी नहीं बदली जीवनशैली
दो बार विधायक रहने के बावजूद राजेश बहेलिया की सादगी में कोई बदलाव नहीं आया। बताया जाता है कि वह लंबे समय तक साधारण मोटरसाइकिल से ही आवागमन करते रहे। उन्होंने अपने राजनीतिक पद का इस्तेमाल निजी सुख-सुविधाओं के लिए करने के बजाय जनता के बीच अपना विश्वास और सम्मान कायम रखा।
राजनीतिक निकटता का नहीं उठाया निजी लाभ
अपने समय के प्रख्यात नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से उनके घनिष्ठ एवं आत्मीय संबंध रहे। इसके बावजूद उन्होंने कभी राजनीतिक निकटता का व्यक्तिगत लाभ उठाने का प्रयास नहीं किया। उनका जीवन इस बात का प्रतीक रहा कि राजनीति में पद और प्रतिष्ठा से अधिक महत्वपूर्ण चरित्र, ईमानदारी और जनसेवा है।
हृदय गति रुकने से हुआ असामयिक निधन
हृदय गति रुकने से हुए उनके असामयिक निधन को चकिया क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनके निधन से क्षेत्र ने एक सरल, निष्कलंक और जनहित के प्रति समर्पित नेता खो दिया है। उनके जाने से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में एक खालीपन महसूस किया जा रहा है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए बनी रहेगी प्रेरणा
राजेश बहेलिया की सादगी, संघर्षशीलता और जनसेवा की भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन से यह संदेश दिया कि जनता का विश्वास ही किसी जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी पूंजी होती है। उनकी स्मृतियां चकिया की राजनीतिक और सामाजिक चेतना में लंबे समय तक जीवित रहेंगी।
