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नौसेना को मिली दूसरी पनडुब्बी, चीन-पाकिस्तान की उड़ी नींद

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चौंकाने वाली हैं खूबियां

नई दिल्ली। परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल से लैस अरिहंत श्रेणी की दूसरी पनडुब्बी गुरुवार को नौसेना को मिल गई। परमाणु शक्ति संपन्न ‘आइएनएस अरिघात’ को विशाखापत्तनम में नौसेना में शामिल किया गया। ‘आइएनएस अरिघात’ को भारत की नौसैनिक शक्ति और परमाणु प्रतिरोध क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। तो वहीं भारत की इस उपलब्धि से चीन और पाकिस्तान की नींद उड़ गई है।

लंबे समय तक पानी में रहने का रिकॉर्ड –

दोनों पनडुब्बियों में 83 मेगावाट के प्रेशराइज्ड लाइट-वाटर रिएक्टर लगे हैं जिससे वे बिना ऊपर आए लंबे समय तक पानी में रह सकती हैं। जबकि पारंपरिक डीजल-इलेक्टि्रक पनडुब्बियों को नियमित अंतराल पर सतह पर आना पड़ता है। अचानक हुए हमले से बचने व जवाबी हमले करने की क्षमता के कारण SSBN प्रतिरोधक की महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दुश्मन के लिए इनको तलाश कर पाना भी कठिन होता है।अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों के पास लंबी दूरी की मिसाइलों वाली बड़ी एसएसबीएन हैं। उदाहरण के लिए चीन के पास छह जिन-क्लास SSBN हैं जो जेएल-3 मिसाइलों से लैस है।

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भारत के न्यूक्लियर ट्रायड यानी जल-थल और नम से परमाणु हमला करने की क्षमता और मजबूत हुई है। INS ‘अरिघात’ भारत की रणनीतिक क्षमताओं को बढ़ाएगी और इससे एशिया प्रशांत क्षेत्र में भारत का प्रभाव बढ़ेगा। चीन के साथ जारी सैन्य टकराव के बीच विश्वसनीय रणनीतिक निरोध के लिए यह महत्वपूर्ण है। अमेरिकी नौसेना के पास कुल 71 पनडुब्बियों का बेड़ा है, जिसमें 14 बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां हैं।

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