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किसानों की आय दोगुना करने के लिए शिवराज सिंह चौहान ने बनाया मास्टर प्लान

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केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को बिहार की राजधानी पटना में कृषि भवन में किसानों के साथ परिचर्चा की। उन्होंने कहा, ” कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति मैं आभार प्रकट करता हूं, जिन्होंने किसानों की सेवा का काम मुझे दिया है। किसानों की सेवा ही मेरे लिए भगवान की पूजा है। हम पूरी कोशिश करेंगे कि हम देश के किसानों का कल्याण कर सकें।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त के दिन लाल किले से कहा कि वह तीन गुना तेजी से काम करेंगे। मैं बिहार की सरकार, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और कृषि विभाग को बधाई देना चाहता हूं। वे लगातार किसान के कल्याण के काम में लगे हुए हैं।

आज मैंने स्टॉल देखे हैं, मखाना, चावल, शहद, मक्का, चाय ; सब कुछ अद्भुत है। बिहार के किसानों को मैं प्रणाम करता हूं। बड़े जमीन के टुकड़े हमारे पास नहीं हैं, 91 प्रतिशत सीमांत किसान हैं। लेकिन, फिर भी किसान चमत्कार कर रहे हैं। किसानों की आय दोगुना करने का अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुरू किया है।”

कृषि का विविधीकरण सरकार के रोडमैप में
शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “कृषि का विविधीकरण सरकार के रोडमैप में है। परम्परागत फसलों के साथ ही ज्यादा पैसे देनेवाली फसलों को बढ़ावा देने में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। मैं फूड प्रोसेसिंग की बात भी करना चाहूंगा। बिहार का टैलेंट दुनिया में अद्भुत है। इस टैलेंट का ठीक उपयोग बिहार को भारत का सिरमौर नहीं बनायेगा, भारत को दुनिया का सिरमौर बना देगा। इसे खेती में और कैसे लगा सकते हैं, नये आइडियाज के साथ। केमिकल फर्टिलाइजर का उपयोग आखिर हम कब तक करेंगे। इससे उर्वरक क्षमता भी कम होती है और जो उत्पादन होता है, उनका शरीर पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। आजकल केंचुए गायब हो गये हैं। खाद डाल कर उनका समापन ही कर दिया। केंचुआ 50-60 फीट जमीन के नीचे जाता है, ऊपर आता है, इससे जमीन उर्वरक रहती है।”

केन्द्रीय मंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री के नेतृत्व में प्राकृतिक खेती का मिशन शुरू हो रहा है। इससे उत्पादन घटेगा नहीं, बढ़ेगा। मैं अगली बार पूरा समय लेकर आऊंगा। इसके बाद हम खेतों में ही कार्यक्रम करेंगे, प्रैक्टिकल प्रॉबलम भी देखेंगे। किसान के बिना दुनिया नहीं चल सकती है। बाकी चीजें तो फैक्ट्री में बन जाएंगी लेकिन गेहूं-चावल कहां से लाओगे? हम सब मिलकर काम करेंगे।”

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