गाजीपुर
आसपुर में हिंदू समुदाय ने धूमधाम से चढ़ाई गागर-चादर
बाबा फखरुद्दीन शाह के मजार पर उमड़े श्रद्धालु, गंगा-जमुनी तहजीब और कौमी एकता की दिखी मिसाल
बहरियाबाद, गाजीपुर। बहरियाबाद क्षेत्र की ग्राम सभा आसपुर में बाबा फखरुद्दीन शाह के सदियों पुराने मजार पर 2 अक्टूबर को पारंपरिक रूप से गागर-चादर चढ़ाई गई। इस दौरान बड़ी संख्या में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भाग लेकर आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया। कार्यक्रम में महिलाओं की भी अच्छी भागीदारी रही।

कई दशकों से निभाई जा रही परंपरा
मजार की देखरेख रमेश पांडे करते हैं। उनके परिवार का इस मजार से गहरा संबंध बताया जाता है। इसी जुड़ाव के चलते उनके परिवार की ओर से प्रत्येक वर्ष 2 अक्टूबर को घर से गागर-चादर लेकर मजार पर चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में क्षेत्र के लोग उत्साहपूर्वक शामिल होते हैं। उर्स के अवसर पर हर साल कव्वाली का आयोजन भी किया जाता है।
हिंदू-मुस्लिम एकता की दिखी झलक
कार्यक्रम में अश्विनी चौबे, वेदांत चौबे, गोलू पांडे, बादल पांडे, मकसूद अंसारी, महबूब अंसारी, इम्तियाज अंसारी और साहिल अंसारी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने मजार पर चादर चढ़ाकर अपनी आस्था प्रकट की।
साझी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है उर्स
आसपुर में आयोजित यह कार्यक्रम क्षेत्र की गंगा-जमुनी तहजीब और साझी सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। सूफी परंपरा में उर्स को सूफी संत के ईश्वर से मिलन के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस आयोजन में विभिन्न समुदायों के लोगों की सहभागिता आपसी सद्भाव, सामाजिक मेलजोल और कौमी एकता का संदेश देती है।
