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गाजीपुर

कुछ नया, कुछ पुराना! रंग-पेंट कर पंप स्टेशन को दिखाया नया, ढाई किमी नहर में डेढ़ किमी जंगल-झाड़ियां

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नुरुद्दीनपुर में सिंचाई व्यवस्था पर सवाल, ग्रामीणों ने पंप स्टेशन की तकनीकी जांच और नहर की सफाई की उठाई मांग

नुरुद्दीनपुर (गाजीपुर)। खानपुर थाना क्षेत्र के नुरुद्दीनपुर में नदी के ऊपर सिंचाई व्यवस्था के लिए स्थापित तैरता हुआ पंप स्टेशन इन दिनों ग्रामीणों के बीच चर्चा और चिंता का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंप स्टेशन के कुछ उपकरण नए लगाए गए हैं, जबकि कई पुराने उपकरणों की सर्विसिंग कर उन पर रंग-पेंट कर उन्हें नया जैसा दिखाने का प्रयास किया गया है। ग्रामीणों ने पूरे पंप स्टेशन की तकनीकी जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सिंचाई व्यवस्था के लिए लगाए गए उपकरण वास्तव में कितने सुरक्षित और उपयोगी हैं।

पुराने उपकरणों को सर्विस कर किया गया चालू

ग्रामीणों के मुताबिक पंप स्टेशन काफी समय से खराब पड़ा था। अब इसमें कुछ नए उपकरण लगाए जाने के साथ पुराने उपकरणों की मरम्मत और सर्विसिंग कर स्टेशन को दोबारा चालू किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि चक वॉल्व, वैक्यूम पंप, पावर केबल और स्विच वॉल्व समेत कुछ उपकरण पुराने हैं। इनकी सर्विसिंग के बाद रंग-पेंट किए जाने से उपकरण देखने में नए नजर आ रहे हैं।

ग्रामीणों को आशंका है कि पुराने उपकरणों के सहारे यदि लंबे समय तक सिंचाई व्यवस्था संचालित की गई तो भविष्य में बार-बार खराबी की समस्या सामने आ सकती है। इसका सीधा असर आसपास के गांवों के किसानों पर पड़ेगा, जिन्हें फसलों की सिंचाई के लिए इसी व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ता है।

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करीब एक दर्जन गांवों की सिंचाई व्यवस्था जुड़ी

बताया जा रहा है कि यह पंप स्टेशन क्षेत्र के करीब एक दर्जन गांवों की सिंचाई व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इसकी जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण पंप स्टेशन पर विभाग की ओर से कोई स्थायी कर्मचारी तैनात नहीं है।

ग्रामीणों के अनुसार वर्तमान में एक अस्थायी निजी कर्मचारी के भरोसे ही स्टेशन की निगरानी और संचालन की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पंप स्टेशन की नियमित निगरानी और तकनीकी देखरेख के लिए विभाग की ओर से स्थायी कर्मचारी की तैनाती की जाए।

ढाई किलोमीटर नहर में डेढ़ किलोमीटर तक जंगल-झाड़ियां

पंप स्टेशन की समस्या के साथ ही इससे निकलने वाली नहर की स्थिति भी ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। करीब ढाई किलोमीटर लंबी नहर में लगभग एक किलोमीटर हिस्से की सफाई होने की बात ग्रामीणों ने कही है, जबकि इसके आगे करीब डेढ़ किलोमीटर तक नहर के अंदर जंगल-झाड़ियां उगी हुई हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि नहर के इस हिस्से की सफाई लगभग एक वर्ष से नहीं हुई है। झाड़ियों और जंगली घास के कारण नहर में पानी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है। यदि पंप स्टेशन से पूरी क्षमता के साथ पानी छोड़ा जाता है तो झाड़ियों के कारण पानी के प्रवाह में रुकावट पैदा हो सकती है।

पंप और मोटर पर भी असर पड़ने की आशंका

ग्रामीणों का कहना है कि नहर की समय पर सफाई नहीं होने से केवल सिंचाई व्यवस्था ही प्रभावित नहीं होगी, बल्कि पानी के दबाव और प्रवाह में बाधा के कारण पंप और मोटर पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इससे पंप स्टेशन में तकनीकी खराबी आने की आशंका बनी रहेगी।

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किसानों का कहना है कि सिंचाई व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए केवल पंप स्टेशन को चालू कर देना पर्याप्त नहीं है। पंप, मोटर, वॉल्व और केबल की तकनीकी स्थिति के साथ-साथ पानी के निकास वाली पूरी नहर की सफाई भी जरूरी है।

ग्रामीणों ने उठाई जांच और सफाई की मांग

ग्रामीण अमित सिंह, पिंटू सिंह, शैलेन्द्र सिंह और अनुज सिंह समेत अन्य लोगों ने संबंधित विभाग से पूरे मामले में गंभीरता से कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने पंप स्टेशन के सभी उपकरणों की तकनीकी जांच कराने, पुराने उपकरणों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने, नहर की पूरी लंबाई में तत्काल सफाई कराने और स्टेशन पर स्थायी कर्मचारी की तैनाती की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पंप स्टेशन और नहर की व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त नहीं किया गया तो आने वाले समय में तकनीकी खराबी और बाधित जलप्रवाह के कारण किसानों को सिंचाई के लिए परेशानी उठानी पड़ सकती है। उनके मुताबिक सिंचाई व्यवस्था को केवल रंग-पेंट से नया दिखाने के बजाय तकनीकी रूप से भी मजबूत और सुरक्षित बनाया जाना जरूरी है।

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