आजमगढ़
हिस्ट्रीशीटर के प्रेस कार्ड इस्तेमाल पर उठे सवाल
पुलिस रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने के बाद थाने और राजस्व टीम के सामने पत्रकार की पहचान के इस्तेमाल की जांच की मांग
आजमगढ़। निजामाबाद थाना क्षेत्र के जमीन कटघर निवासी अरुण कुमार पाण्डेय उर्फ बबलू पाण्डेय के संबंध में पुलिस रिकॉर्ड में हिस्ट्रीशीट और कई मुकदमों का उल्लेख सामने आने के बाद उसके पत्रकार के रूप में प्रेस पहचान-पत्र इस्तेमाल करने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार वह निजामाबाद तहसील रिपोर्टर के रूप में भी कार्य करता रहा है।
पुलिस रिकॉर्ड में हिस्ट्रीशीट का उल्लेख
उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक अरुण कुमार पाण्डेय के खिलाफ अलग-अलग वर्षों में विभिन्न थानों में कई मुकदमे दर्ज हैं। इनमें तीन एससी/एसटी एक्ट से जुड़े मामले भी बताए गए हैं। रिकॉर्ड में वर्ष 2016 में गुंडा एक्ट की कार्रवाई और हिस्ट्रीशीट खोले जाने का उल्लेख है।

आईजीआरएस प्रकरण में क्षेत्राधिकारी सदर की रिपोर्ट में थाना निजामाबाद के अभिलेखों के आधार पर हिस्ट्रीशीट की कार्रवाई तथा 24 दिसंबर 2025 को गुंडा एक्ट की कार्रवाई किए जाने का उल्लेख है। रिपोर्ट में हिस्ट्रीशीट दूसरी बार खोले जाने की बात भी कही गई है।
रशीदगंज चौकी की सूची में नाम
रशीदगंज पुलिस चौकी पर चस्पा हिस्ट्रीशीटरों की सूची में क्रम संख्या एक पर एचएस-30(बी) अरुण कुमार पाण्डेय उर्फ बबलू का नाम दर्ज होने की बात सामने आई है। दस्तावेज सामने आने के बाद पत्रकार के रूप में उसकी गतिविधियों और पुलिस थाने में आवाजाही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
प्रेस कार्ड के इस्तेमाल पर सवाल
कुछ समय पूर्व थाना परिसर की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसमें अरुण पाण्डेय नजर आया था। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या पत्रकार होने की पहचान और प्रेस कार्ड के आधार पर थाने में उसकी आवाजाही होती थी। साथ ही संबंधित समाचार संस्थान द्वारा पत्रकार के रूप में जिम्मेदारी देने से पहले उसके पुलिस रिकॉर्ड के सत्यापन को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
इसी तरह राजस्व टीम या अधिकारियों के सामने प्रेस कार्ड के कथित इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा है। हालांकि इस संबंध में किसी स्वतंत्र प्रमाण, लिखित शिकायत या संबंधित अधिकारी के बयान की पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे किसी घटनाक्रम की पुष्टि होने पर ही इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
संपादक ने हटाने की कही बात
मामले को लेकर संबंधित समाचार संस्थान के संपादक की ओर से अरुण पाण्डेय को संस्थान से तत्काल हटाने की बात कही गई है। हालांकि, उसे वास्तव में हटाया गया है या नहीं और इस संबंध में कोई लिखित आदेश जारी हुआ है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों, राजस्व विभाग और समाचार संस्थान का पक्ष महत्वपूर्ण है। अरुण कुमार पाण्डेय उर्फ बबलू पाण्डेय का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना उचित होगा।
