वाराणसी
25 सितंबर से शुरू होगी शिवपुर की ऐतिहासिक रामलीला
33 दिन तक चलेगा आयोजन, स्वर परीक्षा में पांच स्वरूपों का चयन; उज्ज्वल मिश्रा निभाएंगे श्रीराम की भूमिका
शिवपुर (वाराणसी)। धर्म और आस्था की नगरी काशी में करीब 150 वर्ष पुरानी शिवपुर की ऐतिहासिक रामलीला की तैयारियां शुरू हो गई हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन 25 सितंबर 2026 से रामलीला का भव्य आयोजन शुरू होगा, जो लगातार 33 दिनों तक चलेगा। रामलीला समिति की ओर से आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
स्वर परीक्षा में पांच स्वरूपों का चयन
रामलीला के लिए रविवार को स्वर परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें कई बालकों ने प्रतिभाग किया। प्रतिभागियों से संस्कृत के श्लोक और रामचरितमानस की चौपाइयों का सस्वर पाठ कराया गया। स्वर की कोमलता, स्पष्ट उच्चारण और भाव-अभिव्यक्ति के आधार पर पांच बाल स्वरूपों का चयन किया गया।
इस वर्ष उज्ज्वल मिश्रा श्रीराम, वैभव मिश्र माता सीता, प्रांजल बाजपेयी भरत, विक्रम चतुर्वेदी लक्ष्मण और सात्विक शर्मा शत्रुघ्न की भूमिका निभाएंगे।
चयन प्रक्रिया के दौरान समिति अध्यक्ष अतुलेश उपाध्याय, मंत्री त्रिलोकी सेठ, उपाध्यक्ष डॉ. विकास सिंह, उपमंत्री रोहित मौर्य, कोषाध्यक्ष आरएन सिंह, आय-व्यय निरीक्षक पृथ्वी नाथ शर्मा, व्यास उदय शंकर मिश्र समेत कई लोग मौजूद रहे।
गणेश पूजन के बाद शुरू होगा प्रशिक्षण
चयनित पांचों स्वरूपों का प्रशिक्षण गणेश पूजन के बाद धर्मशाला में शुरू होगा। रामलीला के पूर्व मंत्री नरेंद्र श्रीवास्तव की देखरेख में बाल स्वरूपों को संवादों का अभ्यास कराया जाएगा। प्रशिक्षण में संवाद कंठस्थ कराने के साथ भाव-भंगिमा, मंच संचालन और पारंपरिक अभिनय शैली की बारीकियां सिखाई जाएंगी।
150 साल पुरानी है रामलीला की परंपरा
शिवपुर रामलीला की परंपरा करीब 150 वर्ष पुरानी बताई जाती है। बुजुर्गों के अनुसार पूर्व में रामलीला देखने दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष ट्रेन तक चलाई जाती थी। समय के साथ आयोजन का स्वरूप बदला, लेकिन इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं आज भी कायम हैं।
मानस की चौपाइयों पर होता है मंचन
शिवपुर की रामलीला गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस पर आधारित है। इसमें संवादों का उच्चारण पारंपरिक शैली में किया जाता है। आयोजन में फिल्मी संगीत या आधुनिक मंचीय प्रभावों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। प्रत्येक प्रसंग का मंचन मानस की चौपाइयों और दोहों के अनुरूप होता है। यही विशेषता शिवपुर रामलीला को धार्मिक आयोजन के साथ भारतीय लोकनाट्य की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर बनाती है।
