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जौनपुर

फाइब्रॉइड के आधुनिक उपचार पर मंथन

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डॉक्टरों ने हिंसा के खिलाफ ली शपथ

JOGS के कार्यक्रम में महिला स्वास्थ्य और चिकित्सकों की सुरक्षा पर चर्चा, जागरूकता रैली निकाल दिया सुरक्षित चिकित्सा व्यवस्था का संदेश

जौनपुर। महिलाओं के स्वास्थ्य और चिकित्सकों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर JOGS की ओर से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में फाइब्रॉइड के आधुनिक चिकित्सा एवं शल्य उपचार के विकल्पों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की। वहीं अभया दिवस के अवसर पर चिकित्सकों के खिलाफ हिंसा के विरोध में शपथ दिलाई गई और जागरूकता रैली निकालकर सुरक्षित एवं सम्मानजनक चिकित्सा व्यवस्था का संदेश दिया गया।

हर मरीज के लिए अलग उपचार जरूरी

कार्यक्रम के दौरान आयोजित सीएमई में ‘Medical and Surgical Management of Fibroid – Choosing the Right Patient, Right Treatment’ विषय पर न्यू लाइफ हॉस्पिटल, वाराणसी की निदेशक डॉ. नीलम ओहरी ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फाइब्रॉइड से पीड़ित प्रत्येक मरीज के लिए उपचार की एक ही पद्धति उपयुक्त नहीं हो सकती। मरीज की उम्र, लक्षण, फाइब्रॉइड का आकार और उसकी स्थिति के साथ भविष्य में गर्भधारण की इच्छा को ध्यान में रखकर उपचार का निर्णय किया जाना चाहिए।

आधुनिक उपचार के कई विकल्प उपलब्ध

डॉ. नीलम ओहरी ने बताया कि वर्तमान चिकित्सा पद्धति में फाइब्रॉइड के उपचार के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। इसलिए मरीज की व्यक्तिगत स्थिति का समुचित मूल्यांकन कर उसके लिए उपयुक्त उपचार पद्धति का चयन करना जरूरी है। उन्होंने चिकित्सकों से मरीजों को उपचार के विभिन्न विकल्पों की जानकारी देने पर भी जोर दिया।

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चिकित्सक और मरीज के बीच संवाद जरूरी

कार्यक्रम की अध्यक्षता JOGS अध्यक्ष डॉ. अंजू कनौजिया ने की। उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिकित्सक और मरीज के बीच विश्वास, संवाद और आपसी सम्मान बेहद जरूरी है। किसी समस्या या असहमति की स्थिति में बातचीत और संवेदनशीलता के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए।

डॉक्टरों ने हिंसा के खिलाफ ली शपथ

अभया दिवस के अवसर पर चिकित्सकों ने अस्पतालों में हिंसा के खिलाफ एकजुट होकर सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण बनाए रखने की शपथ ली। इसके बाद जागरूकता रैली निकाली गई। रैली में ‘No Violence Against Doctors’, ‘Respect Doctors, Save Healthcare’ और ‘हिंसा का समाधान संवाद है’ जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया।

डॉक्टरों की सुरक्षा को बताया जरूरी

चिकित्सकों ने कहा कि डॉक्टर और मरीज एक-दूसरे के सहयोगी हैं। इलाज के दौरान किसी प्रकार की परेशानी या असहमति होने पर बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए। हिंसा से समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं का वातावरण प्रभावित होता है। महिला स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने लिया हिस्सा

कार्यक्रम में डॉ. शुभा सिंह, डॉ. शकुंतला यादव, डॉ. मधु, डॉ. प्रियंवदा, डॉ. आरके गुप्ता और डॉ. रीता दुबे समेत कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शैलि निगम ने किया। इसमें JOGS के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में चिकित्सक शामिल हुए। कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और चिकित्सकों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक एवं भयमुक्त कार्यस्थल सुनिश्चित करने का संदेश दिया गया।

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