गाजीपुर
हर सरकारी जिम्मेदारी निभाने वाले शिक्षकों को मिले सम्मान और सामाजिक सुरक्षा : सुनील यादव
राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले शिक्षकों की मांगों पर सरकार ले सकारात्मक निर्णय
पुरानी पेंशन को बताया सामाजिक सुरक्षा की गारंटी, टीईटी अनिवार्यता समाप्त करने की उठाई मांग
सादात (गाजीपुर)। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक केवल बच्चों को शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शासन और प्रशासन द्वारा सौंपे जाने वाले विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का भी पूरी निष्ठा एवं जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करते हैं। यह बात अटेवा के ब्लॉक अध्यक्ष सुनील यादव ने शिक्षकों की समस्याओं और उनके अधिकारों को लेकर कही।
उन्होंने बताया कि शिक्षक विधानसभा, लोकसभा एवं पंचायत चुनावों के अलावा जनगणना, राशन वितरण, बोर्ड परीक्षाओं, बीएड प्रवेश परीक्षा, सिपाही भर्ती परीक्षा, शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी), केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) तथा डीएलएड उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन जैसे अनेक महत्वपूर्ण कार्यों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
कोरोना काल में भी निभाई अग्रिम पंक्ति की भूमिका
सुनील यादव ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान भी शिक्षकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर टीकाकरण अभियान, सर्वेक्षण, राहत कार्यों तथा जनजागरूकता कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस दौरान कई शिक्षक संक्रमित हुए और अनेक शिक्षकों ने कर्तव्य पालन करते हुए अपने प्राण भी गंवाए। इसके बावजूद शिक्षकों की समस्याओं और मांगों के प्रति अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई।
पुरानी पेंशन को बताया सम्मानजनक भविष्य की गारंटी
उन्होंने कहा कि जब सरकार और प्रशासन को हर महत्वपूर्ण कार्य के लिए शिक्षकों की ईमानदारी, कार्यक्षमता और निष्ठा पर पूरा भरोसा है, तो उनके भविष्य की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। पुरानी पेंशन कोई विशेष सुविधा नहीं, बल्कि कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक भविष्य की गारंटी है।
आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को मिले राहत
अटेवा नेता ने मांग करते हुए कहा कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम लागू होने से पूर्व चयनित शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता समाप्त की जानी चाहिए, क्योंकि उनकी नियुक्तियां तत्कालीन नियमों और प्रक्रियाओं के तहत हुई थीं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका सर्वोपरि है। ऐसे में सरकार को शिक्षकों के समर्पण, त्याग और योगदान का सम्मान करते हुए उनकी न्यायोचित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
“शिक्षकों के भविष्य की सुरक्षा भी राष्ट्र की जिम्मेदारी”
सुनील यादव ने कहा, “जो शिक्षक राष्ट्र का भविष्य संवारते हैं, उनके भविष्य की सुरक्षा भी राष्ट्र की जिम्मेदारी है।“ उन्होंने सरकार से शिक्षकों के हितों की रक्षा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
