वाराणसी
भारत-मॉरीशस सनातन सांस्कृतिक सम्मेलन में युवाओं को मिला संस्कृति और नेतृत्व का संदेश
वैचारिक संगोष्ठी में सनातन संस्कृति, शिक्षा और युवा नेतृत्व पर हुआ मंथन
मॉरीशस। ब्रह्मराष्ट्र एकम् विश्व महासंघ न्यास (BRE) द्वारा आयोजित द्वितीय अंतरराष्ट्रीय भारत-मॉरीशस सनातन सांस्कृतिक सम्मेलन-2026 के अंतर्गत गुरुवार को रवीन्द्रनाथ टैगोर इंस्टीट्यूट के लेक्चर थिएटर में वैचारिक संगोष्ठी एवं व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत और मॉरीशस के बीच सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को सुदृढ़ बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
शिक्षाविदों और युवाओं ने रखे विचार
परम पूज्य श्री श्री 1008 डॉ. सचिन्द्रनाथ जी महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं तथा विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रो. डॉ. दिनेश चाहल, कुशाग्र मिश्रा, अनिष्ठा लाल सिंह रगजी, दर्शुन बी. राज तथा अवशेष पांडेय (कल्लू महाराज) ने सनातन संस्कृति, युवा नेतृत्व, शिक्षा, आध्यात्मिक चेतना और भारत-मॉरीशस के सांस्कृतिक संबंधों पर अपने विचार व्यक्त किए।
विद्यार्थियों की रही उत्साहपूर्ण भागीदारी
कार्यक्रम में डीएवी कॉलेज पोर्ट लुईस, डीएवी कॉलेज सेंट एंड्रे, महात्मा गांधी सेकेंडरी स्कूल सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
वक्ताओं ने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि मजबूत नेतृत्व और नैतिक मूल्यों के माध्यम से ही समाज और राष्ट्र का समग्र विकास संभव है।
“वसुधैव कुटुम्बकम्” के संदेश पर जोर
संगोष्ठी में वक्ताओं ने “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को वैश्विक एकता, सामाजिक समरसता और मानव कल्याण का आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व को शांति, सहयोग और सह-अस्तित्व का संदेश देती है।
सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने वाली पहल
सम्मेलन में उपस्थित अतिथियों ने आयोजन को भारत और मॉरीशस के बीच सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को और मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण पहल बताया।
कार्यक्रम की सफलता में BRE मॉरीशस के कंट्री प्रेसिडेंट चंद्रज्योति बूबून, पूर्व विधायक डॉ. कल्याणी जुग्गू तथा सचिव जयचंद लालबीहैरी के योगदान की सराहना की गई।
