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गोरखपुर

फर्जी मर्चेंट क्यूआर कोड बनाकर करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार

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1308 जीपे साउंडपॉड, 866 क्यूआर स्कैनर और 13 मोबाइल फोन बरामद

फर्जी दस्तावेजों के सहारे तैयार करते थे मर्चेंट अकाउंट, साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे सुविधा

गोरखपुर। साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत गोरखपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। थाना कोतवाली पुलिस, साइबर कमांडो टीम और जनपदीय एंटी थेफ्ट टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए फर्जी दस्तावेजों के जरिए मर्चेंट क्यूआर कोड बनाकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और संदिग्ध सामग्री बरामद की है।

तीन आरोपी गिरफ्तार

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कुशीनगर निवासी संकेत राय, गोरखनाथ क्षेत्र निवासी तौहीद आलम उर्फ गोलू तथा शाहपुर निवासी राज सिंह के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके खिलाफ थाना कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

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करोड़ों रुपये के साइबर फ्रॉड से जुड़े मिले सुराग

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी पैन कार्ड, आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग कर Google Pay, BharatPe, Mobikwik सहित विभिन्न कंपनियों के मर्चेंट क्यूआर कोड तैयार करते थे। इन क्यूआर कोड का इस्तेमाल साइबर ठगी से अर्जित धनराशि के लेन-देन और निकासी में किया जाता था।

आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में कई लोगों के फर्जी दस्तावेज, बैंक खातों का विवरण और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। प्रारंभिक जांच में इन खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी सामने आई है। कई राज्यों में इन खातों से संबंधित साइबर शिकायतें भी दर्ज पाई गई हैं।

म्यूल बैंक खातों का करते थे इस्तेमाल

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे लोगों को बहला-फुसलाकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन खातों को मर्चेंट अकाउंट के रूप में पंजीकृत कराते थे। मर्चेंट क्यूआर कोड और साउंडपॉड लगाने से खातों में नियमित लेन-देन दिखता था, जिससे शिकायत होने के बाद भी खाते तुरंत फ्रीज नहीं हो पाते थे।

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भारी मात्रा में उपकरण बरामद

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 13 मोबाइल फोन, 5 सिम कार्ड, 1308 जीपे साउंडपॉड और 866 क्यूआर स्कैनर बरामद किए हैं। बरामद सामग्री से यह संकेत मिलता है कि गिरोह बड़े पैमाने पर साइबर अपराधियों को तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रहा था।

साइबर नेटवर्क की गहराई से जांच जारी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए बरामद मोबाइल फोन, बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है और साइबर ठगी के कितने मामलों में इनकी भूमिका रही है।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

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आरोपियों के खिलाफ थाना कोतवाली में मुकदमा संख्या 119/2026 के तहत बीएनएस की धारा 318(4), 340(2), 336(3), 3(5) तथा आईटी एक्ट की धारा 66D में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अन्य धाराएं भी बढ़ाई जा सकती हैं।

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