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वाराणसी

एसआई भर्ती परीक्षा के प्रश्न पर पंडित शब्द के प्रयोग पर उठा विवाद

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वाराणसी। उत्तर प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती परीक्षा के हिंदी खंड में पूछे गए एक प्रश्न को लेकर काशी के विप्र समाज ने कड़ा विरोध जताया। रविवार को वाराणसी के अहिल्याबाई घाट पर एकत्र होकर ब्राह्मण समाज के लोगों ने नारेबाजी की और शंख बजाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे विप्र समाज के संयोजक डा. पवन शुक्ला ने बताया कि परीक्षा के हिंदी खंड में एक प्रश्न पूछा गया था— “अवसर के अनुसार बदल जाने वाले के लिए एक शब्द में उत्तर दें।” इसके विकल्पों में पंडित, अवसरवादी, निष्कपट और सदाचारी दिए गए थे। उन्होंने कहा कि अवसर के अनुसार बदल जाने वाले व्यक्ति के लिए सही शब्द ‘अवसरवादी’ होता है, जबकि ‘पंडित’ शब्द को विकल्प में शामिल करना एक विशेष समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला है। उनके अनुसार ‘पंडित’ शब्द विद्वान, ज्ञानी और धार्मिक सम्मान से जुड़ा हुआ है और इसे अवसरवादिता जैसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना अनुचित और असंवेदनशील है।

डा. पवन शुक्ला ने कहा कि इस प्रकार का प्रश्न न केवल परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि इससे सरकार की छवि धूमिल होने, जातीय तनाव बढ़ने और सामाजिक सद्भाव बिगड़ने की आशंका भी है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि प्रश्न तैयार करने और पेपर सेट करने वाली समिति के जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ तत्काल विभागीय जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही इस प्रश्न को आधिकारिक रूप से निरस्त कर उसमें सुधार किया जाए तथा भविष्य में परीक्षा पत्र तैयार करते समय संवेदनशीलता, निष्पक्षता और सामाजिक सौहार्द का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं पर सरकार को शून्य सहिष्णुता की नीति अपनानी चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान मौजूद लोगों ने “पुलिस भर्ती बोर्ड होश में आओ” और “पंडित समाज का अपमान नहीं सहेगा विप्र समाज” जैसे नारे लगाए तथा तख्तियां हाथों में लेकर विरोध जताया। इस मौके पर डा. अशोक पाण्डेय, आचार्य विकास दीक्षित, विशाल शास्त्री और बृजेश शुक्ल सहित बड़ी संख्या में ब्राह्मण पंडित उपस्थित रहे।

डा. पवन शुक्ला ने यह भी कहा कि पिछले कुछ महीनों से पंडित समाज को नीचा दिखाने का प्रयास किया जा रहा है, चाहे वह घूसखोर पंडित फिल्म का मामला हो या भर्ती बोर्ड के प्रश्नपत्र का। उन्होंने कहा कि विप्र समाज की ओर से मांग की जाती है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न हों और इसके लिए प्रदेश में ब्राह्मण कल्याण बोर्ड की स्थापना की जाए, ताकि ऐसे मामलों में तत्काल निर्णय लेकर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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