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गोरखपुर

गोरखपुर की पावन धरा पर जयदेश परिवार का दिव्य संगम, नई ऊर्जा और नये अध्याय की हुई शुरुआत

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गोरखपुर। गोरक्षपीठ की पावन धरती और बाबा विश्वनाथ की दिव्यता से ओत-प्रोत वाराणसी—जब दो महापीठों की आस्था और परंपरा एक बिंदु पर आकर मिलती है, तब एक अनोखी अध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। इसी अलौकिक वातावरण में जयदेश परिवार के माननीय एमडी आशुतोष जायसवाल का गोरखपुर आगमन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक संगम जैसा प्रतीत हुआ। काशी के प्रतिनिधि रूप में आए आशुतोष जी को परिवार में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के समान सम्मान प्राप्त है, वहीं उनके मार्गदर्शक और हम सभी के संरक्षक रामाश्रय सिंह जी इस पूरे आयोजन में धर्म, मर्यादा और संगठन के प्रतीक बने रहे।

गोरखपुर की धरती पर जब वाराणसी की परंपरा, नैतिकता और सादगी की छाया पड़ती है, तो अनुभव होता है कि मानो बाबा विश्वनाथ और बाबा गोरक्षनाथ स्वयं इस मिलन के साक्षी हों। इस दिव्य वातावरण में विचारों के महर्षि सुमित जायसवाल जी, समर्पण के प्रतीक राम जोखन पांडेय और संगठन की सुगंध बिखेरते अरुण—अर्थात् प्रभात की लालिमा का सम्मिलन पूरी बैठक को आध्यात्मिक रस से भर गया। ऐसा लगा जैसे कई धाराएँ मिलकर एक पवित्र सरिता का रूप ले रही हों।

कार्यक्रम में एमडी साहब द्वारा गोरखपुर को नया संस्करण देने और जनवरी 2026 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को टीवी चैनल से जोड़ने का आश्वासन पूरे परिवार के लिए किसी वरदान से कम नहीं था। यह निर्णय न केवल तकनीकी विकास का संकेत है, बल्कि पत्रकारिता के विस्तार, नव निर्माण और नई संभावनाओं का मार्ग भी खोलता है। जयदेश परिवार ने इस संकल्प को आशीर्वाद के रूप में स्वीकार किया।

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बैठक में गोरखपुर और बस्ती मंडल के उत्थान पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। सभी सदस्यों ने एकजुटता, सहयोग और संगठन की मजबूती पर जोर दिया। परिवार के हर सदस्य ने अपने एमडी एवं सम्पादक के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की कि उन्होंने न केवल दिशा दिखाई बल्कि आशीर्वाद देकर सभी को नई ऊर्जा से भर दिया।

इस अवसर का सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक क्षण वह था, जब दो महीने 14 दिन के ‘वनवास’ के बाद राम—अर्थात् राम जोखन पांडेय—को पुनः ‘राजगद्दी’ पर आसीन किया गया। गोरखपुर के जयदेश परिवार ने उन्हें नए जिला ब्यूरो प्रमुख के रूप में एक स्वर में स्वीकार करते हुए उनके अनुभव, समर्पण और निष्ठा को सम्मान दिया। यह क्षण इतना भावनात्मक था कि पूरा वातावरण तालियों, जयघोष और आत्मीयता से भर गया। मानो किसी पौराणिक कथा का प्रसंग यथार्थ रूप में सामने उतर आया हो।

गोरखपुर और बस्ती मंडल की ओर से एमडी साहब एवं सम्पादक महोदय को कोटि-कोटि धन्यवाद ज्ञापित किया गया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब परंपरा, पत्रकारिता और आध्यात्मिकता साथ चलें, तब परिवार केवल संगठन नहीं रहता—वह एक संस्कार बन जाता है।

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जयदेश परिवार आज गोरखपुर की पावन धरा पर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है और भविष्य की उज्ज्वल दिशा की ओर नए कदम बढ़ा चुका है।

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