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गाजीपुर

हथियाराम मठ में चातुर्मास महाव्रत और अतिरुद्र महायज्ञ का आयोजन, श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

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गाजीपुर। सिद्धपीठ हथियाराम मठ के 26वें पीठाधिपति एवं जूना अखाड़ा के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज द्वारा चातुर्मास महाव्रत एवं अतिरुद्र महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। श्रावण मास की प्रतिपदा से शुरू हुआ यह महानुष्ठान भाद्रपद पूर्णिमा तक चलेगा। पुण्य लाभ की कामना लेकर प्रतिदिन बड़ी संख्या में शिष्य और श्रद्धालु महायज्ञ में शामिल हो रहे हैं।

महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज ने चातुर्मास की महत्ता बताते हुए कहा कि यह समय आहार, विहार और विचार के परिष्करण का अवसर है। यह संयम और सहिष्णुता की साधना करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास में तप, शास्त्राध्ययन, सत्संग, सेवा आदि का विशेष महत्व होता है। साथ ही यह धर्म, परंपरा, संस्कृति और स्वास्थ्य को एक सूत्र में पिरोता है।

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स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज ने बताया कि संयमित आचरण से व्यक्ति न केवल मन को वश में करना सीखता है बल्कि धैर्य और समझ से भरा व्यवहार भी करता है। चातुर्मास ऐसा अवसर है जिसमें हम स्वयं के साथ-साथ दूसरों के अस्तित्व को भी स्वीकार कर उन्हें सम्मान देना सीखते हैं। यह मन के वेग को संयम की रस्सी से बांधने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि आरोग्य विज्ञान और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने भारतीय संस्कृति का सार बताते हुए कहा कि यह अर्पण, तर्पण और समर्पण पर आधारित है। इन तीनों में ही त्याग की भावना निहित है। स्वामी जी ने बताया कि सिद्धपीठ हथियाराम मठ स्थित मृणमयी बुढ़िया माई के पुण्य प्रताप से यहां की माटी चंदन से भी पवित्र है और इस भूमि पर किए गए धार्मिक अनुष्ठान से मन को विशेष शांति मिलती है।

उल्लेखनीय है कि स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज पूर्व में सोमनाथ, नागेश्वर, त्र्यंबकेश्वर, घृष्णेश्वर, भीमाशंकर, ओंकारेश्वर, महाकालेश्वर, काशी विश्वनाथ, रामेश्वरम, मल्लिकार्जुन, केदारनाथ, वैद्यनाथ तथा नेपाल स्थित पशुपतिनाथ महादेव सहित सभी ज्योतिर्लिंगों पर चातुर्मास महायज्ञ संपादित कर चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों से वे सिद्धपीठ हथियाराम मठ में ही यह अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं।

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