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गाजीपुर

स्वतंत्रता सेनानी स्व. जीतन पांडे की प्रतिमा के लिए पुत्र ने लगाई गुहार

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जिलाधिकारी से उम्मीद—स्थल चिह्नित कर लगवाई जाए क्रांतिकारी की प्रतिमा, पुत्र निजी खर्च से उठाने को तैयार

हुरमुजपुर (गाजीपुर)। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में संघर्ष करने वाले हुरमुजपुर क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय जीतन पांडे की प्रतिमा स्थापित कराने की मांग जोर पकड़ने लगी है। उनके पुत्र मिश्री पांडे ने जिलाधिकारी गाजीपुर से प्रतिमा स्थापना के लिए उपयुक्त स्थान चिन्हित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशासन यदि स्थान उपलब्ध करा दे तो वह अपने निजी खर्च से प्रतिमा स्थापित कराने के लिए तैयार हैं।

1942 के आंदोलन में निभाई थी भूमिका

परिजनों के अनुसार वर्ष 1902 में जन्मे स्व. जीतन पांडे ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अंग्रेजी शासन के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाई थी। वर्ष 1942 की क्रांति के दौरान उन्होंने स्थानीय स्तर पर लोगों को संगठित कर आंदोलन में भाग लिया। परिजनों के मुताबिक सादात क्षेत्र में अंग्रेजी शासन से जुड़े संस्थानों के खिलाफ हुई गतिविधियों में भी उनकी भूमिका रही।

परिवार के अनुसार आंदोलन के दौरान अंग्रेजी पुलिस से उनका सामना हुआ। गोलीबारी की एक घटना में उनके सहयोगी अलगू यादव की मौत हो गई, जबकि हरिओम दुबे के पैर में गोली लगी। इसके बाद की घटनाओं और जीतन पांडे की भूमिका को लेकर परिजनों ने कई विवरण बताए हैं। हालांकि इन ऐतिहासिक घटनाओं से संबंधित सभी दावों का स्वतंत्र सत्यापन यहां उपलब्ध नहीं है।

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लंबे समय तक नहीं मिली जानकारी

परिजनों के मुताबिक ब्रिटिश शासन की कार्रवाई तेज होने के बाद जीतन पांडे भूमिगत हो गए और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय रहे। परिवार का यह भी दावा है कि बाद में नंदगंज की घटना के बाद वह लाहौर तक पहुंचे और आजाद हिंद फौज से जुड़े।

परिवार के अनुसार लंबे समय तक उनके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। करीब वर्ष 1968 में परिजनों को उनके संबंध में जानकारी प्राप्त हुई। उनकी पत्नी सरस्वती देवी सहित परिवार को इस दौरान कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।

निजी खर्च से तैयार कराई प्रतिमा

स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र मिश्री पांडे ने अपने निजी धन से पिता की प्रतिमा तैयार कराई है। उनका कहना है कि प्रतिमा तैयार होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अब तक उसके लिए उपयुक्त स्थान चिन्हित नहीं किया गया है।

उन्होंने सैदपुर-मरदह मार्ग पर हुरमुजपुर हाल्ट से सादात-मजई क्षेत्र के बीच उपयुक्त स्थान चिह्नित कर स्व. जीतन पांडे की प्रतिमा स्थापित कराने की मांग की है। मिश्री पांडे ने कहा कि यदि प्रशासन भूमि और स्थान चिन्हित कर दे तो प्रतिमा स्थापना का खर्च वह स्वयं वहन करेंगे।

आने वाली पीढ़ी को मिलेगी जानकारी

मिश्री पांडे ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले स्थानीय क्रांतिकारियों की स्मृतियों को सुरक्षित रखना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ी उनके संघर्ष और योगदान के बारे में जान सके। उन्होंने जिलाधिकारी गाजीपुर से व्यक्तिगत पहल कर प्रतिमा स्थापना के लिए स्थान उपलब्ध कराने की अपील की है।

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स्थानीय लोगों का भी कहना है कि क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों को सार्वजनिक स्थानों पर सम्मान मिलना चाहिए। अब देखना है कि जिला प्रशासन इस मांग पर क्या पहल करता है।

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