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वाराणसी

श्रीमद्भागवत कथा सुनकर कृष्ण भक्त हुए भाव विभोर

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वाराणसी। श्री शुद्धाद्वैत जप यज्ञ समिति वाराणसी के तत्वावधान में श्री वल्लभाचार्य प्राकट्य महोत्सव के अवसर पर दिव्य १०८ श्रीमद् भागवत सप्ताह में बुरहानपुर से पधारे भागवत भूषण पं. आदित्य शास्त्री ने व्यास पीठ पर विराजित हो श्री मद भागवत कथा में वृत्रासुर स्तुति का वर्णन किया –

“अहं हरे तव पादैकमूल-दासा नुदासो भवितास्मि भूयः।”

प्रभु मुझ पर ऐसी कृपा कीजिए कि मैं आपके चरण कमलों पर आश्रित रहने वाले भक्तों का सेवक बनूं। मेरा मन सदा आपके ही चरणों का स्मरण करें। वाणी से मैं निरंतर आप के नामों का संकीर्तन करूं और मेरा शरीर सदा आपकी ही सेवा में लगा रहे तथा मुझे आपको छोड़कर स्वर्ग ,ब्रह्म लोक, पृथ्वी का साम्राज्य, रसातल का राज्य ,योग की सिद्धि और मोक्ष भी नहीं चाहिए।

प्रभु, जैसे पंख विहीन पक्षी दाना लेने गई हुई अपनी मां की प्रतीक्षा करता है। जैसे भूखा बछडा मां के दूध के लिए आतुर रहता है। जैसे विदेश गए हुए पति की पत्नी प्रतीक्षा करती है ठीक उसी प्रकार मेरा मन आपके दर्शनों के लिए छटपटा रहा है। प्रभु मेरा मेरे कर्मों के अनुसार जहां कहीं भी जन्म हो वहां मुझे आप के भक्तों का आश्रय प्राप्त हो।

साथ ही श्रीमद भागवत कथा में नरसिंह अवतार की कथा हुई , भक्त की रक्षा के लिए हमारे प्रभु स्तंभ से फाड़ कर प्रकट हो गए और भक्त प्रहलाद को अपनी गोद में बैठा कर भक्त प्रहलाद को वात्सल्य प्रेम दिया।

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