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वाराणसी

रोटरी उदय ने सेवा सप्ताह में मनाया ‘गुरू वंदन शिष्य अभिनन्दन’

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वाराणसी।ब्रह्मराष्ट्र एकम के साथ मिलकर रोटरी उदय ने अपने सेवा सप्ताह के छठे दिन में शिक्षक दिवस मनाया बड़े धूमधाम से। जैसा कि सर्वविदित है कि भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति व भारत के द्वितीय राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में 5 सितंबर 1962 से शिक्षक दिवस मनाया जाता है।रोटरी क्लब वाराणसी उदय एवं ब्रम्हाराष्ट्र एकम के संयुक्त तत्वावधान में शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर आज , दिनांक 4 सितंबर2022 दिन रविवार को , वाराणसी महमूरगंज , स्थित पाणिनि कन्या महाविद्यालय में शिक्षक दिवस महोत्सव मनाया गया। इस ख़ास मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में संस्कृत विश्वविद्यालय से , प्रोफेसर श्री हरे राम त्रिपाठी जी व महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ से डॉ बंशीधर पांडेय जी उपस्थित रहें। ब्रम्हाराष्ट्र एकम के न्यास सतीश चंद्र मिश्र जी व रोटरी क्लब वाराणसी उदय से सचिव- रोटेरियन अजय दुबे , रोटेरियन अखिलेश रावत , शशि प्रकाश सिंह व रोटेरियन भावना बिश्वास जी उपस्थित रहें। श्रृंगेरी मठ से अन्नपूर्णा शास्त्री जी , पाणिनि कन्या महाविद्यालय की प्राचार्या नन्दिता शास्त्री जी उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम के शुरुआत में सर्वप्रथम अतिथिगणों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। व अंग वस्त्र प्रदान किया गया। तत्पश्चात , हरे राम त्रिपाठी , सतीश चंद्र मिश्र , बंशीधर पांडेय , नन्दिता शास्त्री , अजय दुबे , सचिन मिश्र , जी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन किया गया साथ ही , पाणिनि कन्या महाविद्यालय की बच्चियों द्वारा मंगलाचरण गीत प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात सर्वपल्ली राधाकृष्णन के तस्वीर पर माल्यार्पण किया गया।
बसन्त कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ हर्षिता श्रीवास्तव जी का माल्यार्पण कर इंदु दुबे जी ने स्वागत किया। अनूप श्रीवास्तव जी (सनबीम स्कूल भगवानपुर) का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। रोटरी क्लब की चार्टर महिला संस्थापक प्रिया मिश्रा जी ने डॉ नन्दिता शास्त्री जी का स्वागत किया।व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
श्रीमती किरण सिंह जिन्होंने सुई धागे से भारत का नक्शा बना डाला ऐसी प्रतिभाशाली महिला का सम्मान किया गया।
प्रोफेसर हरे राम त्रिपाठी जी ने
आशीर्वचन सुनाया। उन्होंने कहा जो अनुशासन में रहता है वही शिष्य है। तैत्तिरीय उपनिषद में कहा गया है कि – गुरु सर्वोपरि है गुरु सबसे पूज्य है।
वैशेषिक दर्शन के अनुसार गुरु अपने ज्ञान को शिष्य में समारूपित करता है। गुरु वो तत्व है जो ज्ञान को प्रदान करता है। “भक्ति के बिना मुक्ति हो सकती है , ज्ञान के बिना मुक्ति असम्भव है” मोक्ष की प्राप्ति तत्वज्ञान से होती है। वैशेषिक दर्शन में धर्म का मार्ग गुरु ही दिखाता है।
मनुस्मृति में कहा गया है – इस भूभाग पर गुरु केवल ज्ञान से ही नही अपने मन , वाणी और आचरण से भी अपना ज्ञान शिष्य में भरता है। तत्पश्चात पाणिनि कन्या की बच्चियों द्वारा हाथ मे तलवार और छत्र लेकर अद्भुत प्रस्तुति प्रस्तुत कि गयी।
इस खास मौके पर तमाम विश्वविद्यालयो से शिक्षकगण उपस्थित रहें। उनके नाम हैं-

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श्रीमती आनंद प्रभा सिंह जी
डा रचना श्रीवास्तव जी
श्रीमती साधना श्रीवास्तव जी
श्री अनूप श्रीवास्तव जी
डा आरती विश्वकर्मा जी
डा नंदिता शास्त्री जी
डा प्रीति विमर्शिनी जी
श्रीमती किरण सिंह जी
डा ओम प्रकाश दुबे जी
श्री दीपक शर्मा जी
श्रीमती ऋचा मिश्रा जी
श्रीमती नीलम गुप्ता जी
श्रीमती पूजा केसरी जी
श्रीमती रिचा सिंह जी
श्रीमती चंद्रा अधिकारी जी
डा निर्भय एन राय जी
श्री सुधांशु एस त्रिपाठी जी
श्रीमती नमिता कुशवाहा जी
श्रीमती शारदा मिश्रा जी
श्रीमती राजकुमारी पांडेय जी
पंडित श्रीकान्त शुक्ला जी
श्री सादानंद शाही जी
श्रीमती विद्या शर्मा जी
श्रीमती स्वाति मिश्रा जी
श्री शिवा नन्द मिश्रा जी
श्री एजाज उल्लाह खान जी
श्री रम नारायण यादव
श्री प्रदीप पाठक
श्री राजेश उपाध्याय
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्रोफेसर बंशीधर पांडेय जी ने कहा कि – इस संसार मे केवल दो व्यक्ति बच्चे के तरक़्क़ी से नही , जलते , पहली माँ और दूसरा शिक्षक। साथ ही कहा कि शिक्षक सदैव चाहता है कि मैं अपने शिष्य के नाम से पहचाना जाऊं।

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