गोरखपुर
रेबीज संक्रमित भैंस का दूध पीने से 30 लोगों को लगवाने पड़े इंजेक्शन
गोरखपुर। जनपद के उरुवा क्षेत्र अंतर्गत बेसहनी गांव में उस समय अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया, जब एक रेबीज संक्रमित भैंस का दूध पीने वाले करीब 30 लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगवानी पड़ी। घटना के सामने आने के बाद ग्रामीणों में भय और चिंता का वातावरण व्याप्त हो गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी तत्काल सक्रिय हो गई और प्रभावित लोगों की जांच शुरू कर दी गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव निवासी अभयनाथ की भैंस को लगभग दो माह पूर्व एक संदिग्ध पागल कुत्ते ने काट लिया था। शुरुआत में परिजनों ने इसे सामान्य घटना समझकर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन कुछ दिनों बाद भैंस के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई देने लगा। भैंस ने चारा-पानी छोड़ दिया और वह असामान्य हरकतें करने लगी। स्थिति बिगड़ने पर पशु चिकित्सकों को बुलाया गया, जहां जांच के दौरान भैंस में रेबीज के लक्षण पाए गए। इलाज के प्रयास के बीच भैंस की मौत हो गई।
भैंस की मौत के बाद जब स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की तो पता चला कि गांव के दो परिवारों सहित करीब 30 लोग नियमित रूप से उस भैंस का दूध उपयोग कर रहे थे। यह जानकारी मिलते ही पूरे गांव में दहशत फैल गई। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग तत्काल उरुवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, जहां चिकित्सकों की देखरेख में सभी को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए गए।
चिकित्सकों ने बताया कि रेबीज एक अत्यंत घातक बीमारी है और संक्रमित पशु के संपर्क में आने पर सतर्कता बेहद जरूरी होती है। हालांकि अच्छी तरह उबला हुआ दूध अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है, फिर भी सावधानी के तौर पर सभी लोगों का टीकाकरण कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि किसी पशु के व्यवहार में असामान्य परिवर्तन दिखाई दे तो तत्काल पशु चिकित्सक और प्रशासन को सूचना दें।
घटना के बाद गांव में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जागरूकता अभियान भी चलाया गया। लोगों को रेबीज से बचाव, पशुओं की समय-समय पर जांच और टीकाकरण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशासन ने कहा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सभी प्रभावित लोग फिलहाल सुरक्षित हैं।
