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वाराणसी

मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर वाराणसी कांग्रेस ने जारी किया विरोध पोस्टर

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वाराणसी। केंद्र में मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर बुधवार को वाराणसी महानगर कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली को लेकर तीखी आलोचना की। महानगर अध्यक्ष राघवेन्द्र चौबे ने कहा कि “पिछले 12 वर्षों का कार्यकाल उपलब्धियों से ज्यादा प्रचार, इवेंट मैनेजमेंट और जनभावनाओं के इस्तेमाल का दौर बनकर रह गया है।”

राघवेन्द्र चौबे ने कहा कि “प्रचार की चमक जनता की तकलीफों को नहीं छिपा सकती। जिस सरकार ने देशवासियों को “अच्छे दिन” का सपना दिखाया था, उसी शासनकाल में आम आदमी महंगाई, बेरोजगारी और असुरक्षा जैसी समस्याओं से जूझने को मजबूर है।” कांग्रेस ने सवाल किया कि यदि देश विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है तो रसोई गैस, पेट्रोल, डीजल और खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से जनता परेशान क्यों है।

युवाओं के मुद्दे पर चौबे ने कहा कि करोड़ों नौकरियां देने का दावा करने वाली सरकार के समय में युवा भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक और संविदा व्यवस्था जैसी समस्याओं में उलझकर रह गया है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि “सरकार रोजगार से ज्यादा विज्ञापन तैयार कर रही है।”

महिला सुरक्षा को लेकर कांग्रेस ने कहा कि “बेटी बचाओ” का नारा धरातल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाया। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों ने सरकार की संवेदनशीलता और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा के विषय में चौबे ने कहा कि बड़े-बड़े भाषणों के बावजूद सीमाओं पर तनाव और आंतरिक अस्थिरता ने सरकार की रणनीतिक तैयारियों की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन के मुद्दे पर सरकार की भाषा उतनी सख्त नजर नहीं आई, जितनी चुनावी सभाओं में दिखाई देती है।

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विदेश नीति को लेकर कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि “कैमरों की फ्लैश में कूटनीति सफल दिखाई जा सकती है, लेकिन पड़ोसी देशों के साथ बिगड़ते रिश्ते सच्चाई को सामने ले आते हैं।”

कांग्रेस ने वर्ष 2016 की नोटबंदी को देश की अर्थव्यवस्था पर “आत्मघाती हमला” बताते हुए कहा कि इससे न तो काला धन समाप्त हुआ और न ही भ्रष्टाचार पर रोक लगी, बल्कि छोटे व्यापारियों, मजदूरों और मध्यम वर्ग को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए महानगर अध्यक्ष ने कहा कि जिस किसान ने संकट के समय देश का सहारा बना, उसी अन्नदाता को सड़कों पर अपमान और अविश्वास का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बातचीत की जगह अहंकार को प्राथमिकता दी।

जांच एजेंसियों को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का इस्तेमाल निष्पक्ष कार्रवाई के बजाय राजनीतिक दबाव बनाने के साधन के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “जो सत्ता के साथ खड़ा है वह पवित्र माना जाता है और जो सवाल उठाता है उसे संदिग्ध बना दिया जाता है।”

सामाजिक माहौल पर चिंता व्यक्त करते हुए कांग्रेस ने कहा कि बेरोजगारी और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए समाज में विभाजनकारी बहसों को बढ़ावा दिया गया। पार्टी ने आरोप लगाया कि जनता की वास्तविक समस्याओं पर गंभीर चर्चा करने के बजाय भावनात्मक ध्रुवीकरण को राजनीतिक हथियार बनाया गया।

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विज्ञप्ति के अंत में राघवेन्द्र चौबे ने कहा कि “लोकतंत्र में सरकारें प्रचार से नहीं बल्कि जवाबदेही से बड़ी बनती हैं। अब देश नारों से नहीं, बल्कि 12 वर्षों का स्पष्ट हिसाब मांग रहा है।” इस अवसर पर मोदी सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों को लेकर एक पोस्टर भी जारी किया गया।

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