गाजीपुर
मुस्लिम संस्थापक की अमर विरासत, संस्कृत की सेवा में बहरुल उलूम विद्यालय
बहरियाबाद में 1967 से वेद, पुराण और संस्कृत शिक्षा की परंपरा को आगे बढ़ा रहा संस्थान
बहरियाबाद (गाजीपुर)। भारत की पहचान केवल विविध संस्कृतियों से नहीं, बल्कि उस गंगा-जमुनी तहजीब से भी है, जहां अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग एक-दूसरे की भाषा, साहित्य, ज्ञान और परंपराओं का सम्मान करते हुए समाज को आगे बढ़ाते रहे हैं। बहरियाबाद स्थित बहरुल उलूम संस्कृत विद्यालय इसी साझा विरासत और सामाजिक समन्वय की प्रेरक मिसाल है।
विद्यालय की स्थापना महान शिक्षाविद, धर्मगुरु, समाजसेवी और कुशल राजनीतिज्ञ स्वर्गीय हाफिज अब्दुल मन्नान अंसारी ने एक जनवरी 1967 को की थी। खास बात यह है कि मुस्लिम संस्थापक द्वारा स्थापित इस विद्यालय में आज वेद, पुराण, शास्त्र और संस्कृत भाषा का अध्ययन-अध्यापन किया जा रहा है। यह पहल इस विचार को मजबूती देती है कि ज्ञान और भाषा किसी एक धर्म या समुदाय की सीमा में बंधे नहीं होते।
संस्कृत भारत की प्राचीन ज्ञान-भाषाओं में प्रमुख रही है। वेद, उपनिषद, पुराण, दर्शन, व्याकरण, साहित्य, आयुर्वेद और ज्योतिष सहित अनेक ज्ञान-विधाओं का विशाल साहित्य संस्कृत में उपलब्ध है। ऐसे में इस विद्यालय की स्थापना केवल एक शिक्षण संस्था खड़ी करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की दूरदर्शी पहल भी रही।
वर्तमान प्रबंधन भी आगे बढ़ा रहा विरासत
विद्यालय के वर्तमान प्रबंधक जनाब अब्दुल वाजिद अंसारी संस्था के मूल उद्देश्य और भावना को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। शिक्षा की गुणवत्ता, संस्कृत के अध्ययन और विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य को केंद्र में रखते हुए संस्था को निरंतर विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
विद्यालय विद्यार्थियों को संस्कृत शिक्षा देने के साथ उन्हें भारतीय ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का माध्यम भी बना हुआ है। वेद, पुराण और संस्कृत साहित्य का अध्ययन करने वाले विद्यार्थी देश की प्राचीन बौद्धिक परंपरा को समझने का अवसर प्राप्त कर रहे हैं।
एकता और सद्भाव का संदेश
बहरुल उलूम संस्कृत विद्यालय की सबसे खास विशेषता इसकी स्थापना और वर्तमान कार्यप्रणाली में दिखाई देने वाला सामाजिक समन्वय है। मुस्लिम व्यक्ति द्वारा संस्कृत विद्यालय की स्थापना और उसके माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा का संरक्षण समाज के लिए प्रेरक संदेश देता है।
आज जब समाज में संवाद, सद्भाव और सहयोग की आवश्यकता है, ऐसे संस्थान सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। यह विद्यालय इस बात का संदेश देता है कि शिक्षा और संस्कृति को संकीर्ण सीमाओं में बांटने के बजाय साझा विरासत के रूप में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
