भदोही
‘भदोही नाम संघर्ष की विरासत, इसे पाप कहना आंदोलनकारियों का अपमान’
धर्मेंद्र कुमार मिश्र ‘पप्पू’ बोले- भदोही जिला समाजवादी आंदोलन की देन, नाम बदलने के बजाय कोनिया तहसील बनाने की मांग
भदोही। जिले के नाम परिवर्तन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच समाजवादी विचारधारा से जुड़े धर्मेंद्र कुमार मिश्र ‘पप्पू’ ने बयान जारी कर कहा कि भदोही जनपद का गठन लंबे जनसंघर्ष और सर्वदलीय आंदोलन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक निर्णय को “पाप” बताना उन सभी आंदोलनकारियों का अपमान है, जिन्होंने जिले के गठन के लिए वर्षों तक संघर्ष किया।
धर्मेंद्र मिश्र ने बताया कि उनके पिता समाजवादी चिंतक स्व. प्रभुनाथ मिश्र सहित पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. पं. श्यामधर मिश्र, पूर्व सांसद वंशनारायण सिंह, स्व. रामरति बिंद, पूर्व विधायक स्व. गिरजा शंकर पाठक, स्व. मूलचंद, अधिवक्ता स्व. रामनरेश यादव, स्व. हाजी अब्दुल्ला, स्व. सकल नारायण सिंह, पूर्व विधायक बेचूराम यादव, केशव कृपाल पांडेय, अधिवक्ता बाबू गंगाराम यादव, पूर्व प्रमुख दिनेश सिंह, शिवभूषण सिंह ‘मानस’, प्रदीप यादव, आरिफ सिद्दीकी, सुरेश मिश्र सहित सर्वदलीय भदोही संघर्ष समिति के नेतृत्व में प्रत्येक बुधवार पुरानी कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया जाता था।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान पूरे जनपद में पदयात्रा निकाली गई, हजारों लोगों के हस्ताक्षर कराए गए और 27 जून 1994 को स्व. प्रभुनाथ मिश्र के नेतृत्व में आमरण अनशन की घोषणा की गई थी। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 30 जून 1994 को भदोही नाम से नए जनपद के गठन की घोषणा की थी।
धर्मेंद्र मिश्र ने कहा कि भदोही विश्वभर में अपने कालीन उद्योग के लिए प्रसिद्ध है और इसी पहचान के कारण यहां के कालीनों को जीआई टैग भी प्राप्त है। उनका कहना है कि जिले का नाम इस ऐतिहासिक विरासत और वैश्विक पहचान से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार जनहित में कोई बड़ा निर्णय लेना चाहती है तो नाम परिवर्तन के बजाय कोनिया क्षेत्र में नई तहसील की स्थापना की जाए, ताकि वहां के लोगों को करीब 50 किलोमीटर दूर ज्ञानपुर तहसील न जाना पड़े। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि नाम परिवर्तन पर विचार किया ही जाए तो महर्षि वाल्मीकि, मां जानकी (सीता) अथवा लव-कुश के नाम पर भी विचार किया जा सकता है।
