भदोही
भगवान भी पूजते हैं संयमी व्यक्ति को : पं. प्रमोद
संयम से समझ में आता है श्रीकृष्ण की लीला का रहस्य
रैमलपुर/भदोही। क्षेत्रीय गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन पं. प्रमोद शास्त्री ने कहा कि भागवत की भाषा समाधि की भाषा है। जब मनुष्य समाधिस्थ होकर चिंतन करता है, तभी श्रीकृष्ण की लीलाओं के रहस्य को समझ सकता है।
गोवर्धन पर्वत संयम का प्रतीक
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन की पूजा की। गोवर्धन पर्वत को संयम का प्रतीक माना जाता है। सर्दी, गर्मी और बरसात तीनों परिस्थितियों में पर्वत समान भाव से स्थिर रहता है। उस पर जल और फूल चढ़ाए जाएं या कोई अपमानजनक व्यवहार करे, वह मान-अपमान दोनों में समभाव बनाए रखता है। इसी कारण भगवान ने उसकी पूजा की और उसे अपने से भी ऊंचा स्थान दिया।
संयम आने पर भगवान भी करते हैं पूजा
पं. प्रमोद शास्त्री ने कहा कि कथा का संदेश यही है कि यदि मनुष्य के जीवन में संयम आ जाए तो उसका सम्मान भगवान भी करते हैं। मनुष्य को सुख-दुख, मान-अपमान और विपरीत परिस्थितियों में समभाव बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।
चीरहरण से रुक्मिणी विवाह तक हुआ प्रसंग
कथा के दौरान चीरहरण, वेणु गीत, रासलीला, कंसोद्धार और रुक्मिणी विवाह के प्रसंगों का रोचक वर्णन किया गया। कथा प्रसंगों के दौरान श्रद्धालु भावविभोर नजर आए।
श्रद्धालुओं की रही मौजूदगी
इस अवसर पर यजमान संतोष पाठक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और श्रोता मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का आनंद लिया।
