गोरखपुर
बक्शीपुर पावर हाउस की जर्जर बिल्डिंग, डर के साए में 62 कर्मचारी
1942 में ब्रिटिश शासनकाल में बनी इमारत बदहाल, कर्मचारियों को हादसे का डर; ध्वस्तीकरण कर नई बिल्डिंग बनाने की मांग
गोरखपुर। शहर के बक्शीपुर स्थित पावर हाउस की पुरानी बिल्डिंग जर्जर हालत में पहुंच गई है। वर्ष 1942 में ब्रिटिश शासनकाल में बनी इस इमारत में काम करने वाले करीब 62 कर्मचारी और अधिकारी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जर्जर भवन में काम करने के दौरान हमेशा अनहोनी की आशंका बनी रहती है। शिकायतों के बावजूद अब तक भवन की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है।
एसडीओ पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि भवन की स्थिति को लेकर कर्मचारियों और अधिकारियों में डर बना रहता है, लेकिन विभागीय जिम्मेदारी के कारण काम करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि भवन को ध्वस्त कर नई बिल्डिंग बनाने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। फिलहाल भवन को काफी हद तक खाली करा दिया गया है। अंदर केवल कुछ जरूरी दस्तावेज और सामान रखा गया है, जबकि कर्मचारियों को अलग-अलग स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि जर्जर भवन के कारण कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए धीरे-धीरे कार्यालय से जुड़े कार्यों को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा रहा है।
अधिशासी अभियंता अतुल रघुवंशी ने बताया कि बिजली विभाग के संज्ञान में जर्जर पोल, तार और अन्य क्षतिग्रस्त संसाधनों की जानकारी आने पर उन्हें हटाकर दुरुस्त कराया जा रहा है। पावर हाउस की बिल्डिंग भी खाली कराई जा रही है। फिलहाल भवन के कुछ हिस्सों का उपयोग स्टोर के रूप में किया जा रहा है, जहां सामान रखा गया है।
अधिशासी अभियंता के अनुसार प्रयास है कि भवन को जल्द से जल्द पूरी तरह खाली करा लिया जाए और वहां मौजूद सामान व कर्मचारियों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। विभाग की ओर से जर्जर भवन को ध्वस्त कर नई इमारत के निर्माण के लिए शासन स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।
