आजमगढ़
फैजुल्लापुर में सरकारी शौचालय बदहाल
निर्माण गुणवत्ता और निगरानी पर उठे सवाल
जर्जर भवन, गंदगी और जलभराव ने खोली व्यवस्था की पोल; ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
आजमगढ़। मोहम्मदपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत फैजुल्लापुर में सरकारी योजना के तहत निर्मित शौचालय की बदहाल स्थिति ने विकास कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मौके की तस्वीरों में शौचालय भवन जर्जर नजर आ रहा है। आसपास गंदगी, घास-फूस और जलभराव की स्थिति भी दिखाई दे रही है। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि सरकारी धन से कराया गया निर्माण अपने उद्देश्य में कितना सफल रहा।
प्रधान और सचिव की भूमिका पर भी सवाल
शौचालय निर्माण और उसकी मौजूदा स्थिति को लेकर ग्राम प्रधान दिनेश कुमार और ग्राम पंचायत सचिव मनीष यादव की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि किसी व्यक्ति को अनियमितता का दोषी ठहराने से पहले विभागीय और तकनीकी जांच जरूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण की वर्तमान स्थिति को देखते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी किसने की?
सबसे बड़ा सवाल निर्माण के समय गुणवत्ता की निगरानी को लेकर है। क्या निर्माण कार्य के दौरान ग्राम प्रधान और सचिव ने स्थल का निरीक्षण किया था? क्या संबंधित तकनीकी कर्मचारी ने निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की जांच की थी? यदि निरीक्षण और सत्यापन हुआ था तो निर्माण के बाद भवन की स्थिति इतनी खराब कैसे हुई, इसकी भी जांच जरूरी है।
ब्लॉक स्तर पर भी निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। निर्माण कार्य के दौरान संबंधित अधिकारियों ने स्थलीय निरीक्षण किया था या नहीं और कार्य पूर्ण होने से पहले गुणवत्ता का सत्यापन किस आधार पर किया गया, यह जांच का विषय है।
स्वीकृत राशि और भुगतान का सामने आए पूरा हिसाब
ग्रामीणों ने मांग की है कि शौचालय निर्माण के लिए स्वीकृत धनराशि और किए गए भुगतान का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। इसके लिए माप पुस्तिका (एमबी), बिल-वाउचर, भुगतान विवरण, तकनीकी स्वीकृति, निरीक्षण रिपोर्ट और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र की जांच कराई जानी चाहिए।
यदि जांच में निर्माण मानकों की अनदेखी या वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के साथ सरकारी धन की रिकवरी भी कराई जानी चाहिए।
जलभराव और गंदगी से उपयोगिता पर सवाल
मौके पर शौचालय के आसपास जलभराव और कचरा होने से उसकी उपयोगिता भी सवालों के घेरे में है। भवन की जर्जर हालत और रखरखाव की कमी को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी योजना का उद्देश्य केवल निर्माण पूरा करना नहीं, बल्कि ग्रामीणों को वास्तविक सुविधा उपलब्ध कराना है।
तकनीकी जांच से सामने आएगी हकीकत
स्थानीय लोगों ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि तकनीकी टीम भेजकर शौचालय का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। निर्माण की गुणवत्ता का अभिलेखों और मौके की स्थिति से मिलान कराने के साथ सरकारी धन के इस्तेमाल की भी जांच हो। ग्रामीणों का कहना है कि जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।
