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मिर्ज़ापुर

टेढ़े-मेढ़े पंजों से अब नहीं रुकेगा बचपन का सफर

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मीरजापुर। बच्चों के जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पंजों के इलाज के लिए अब परिवारों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत मंडलीय चिकित्सालय में बुधवार को विशेष उपचार और जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में 30 बच्चों को चिन्हित कर इलाज की शुरुआत की गई।

कार्यक्रम में मौजूद चिकित्सकों ने बताया कि यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क है और इससे अब बच्चों का भविष्य सुरक्षित और सहज हो सकेगा।चिकित्सकों ने बताया कि जिन बच्चों के पैर जन्म से ही टेढ़े-मेढ़े होते हैं, उनकी पहचान कर इलाज की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

हर बुधवार को मंडलीय चिकित्सालय में यह शिविर आयोजित होता है, जहां अब तक हर सप्ताह लगभग 30 से 32 बच्चों को लाभ मिल रहा है। इस सेवा को अनुशिका फाउंडेशन के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों ने समझाया कि इस समस्या को मेडिकल भाषा में ‘क्लब फुट’ कहा जाता है। कई बार गर्भ में ही बच्चों के पंजे भीतरी दिशा में मुड़ जाते हैं, जिससे आगे चलकर चलने-फिरने में समस्या आती है। मंडलीय चिकित्सालय में ऐसे बच्चों का इलाज जन्म से लेकर पांच साल की उम्र तक किया जा रहा है।

कमरा संख्या 09 में हर बुधवार को सुबह 9 से 12 बजे तक यह सेवा दी जाती है।इलाज की प्रक्रिया के बारे में बताया गया कि टेढ़े पंजों को सही करने के लिए मामूली ऑपरेशन के साथ-साथ प्लास्टर की प्रक्रिया अपनाई जाती है। हर सात दिन बाद प्लास्टर बदला जाता है और चार से छह बार यह प्रक्रिया दोहराई जाती है।

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इसके बाद पंजे को स्थिर करने के लिए बेस तैयार किया जाता है। बच्चों को विशेष जूते पहनाए जाते हैं ताकि वे सामान्य रूप से खेल-कूद और चल-फिर सकें।इस योजना के माध्यम से न सिर्फ बच्चों का शरीर सुधरता है, बल्कि उनका आत्मविश्वास और भविष्य भी बेहतर होता है।

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