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वाराणसी

IMS BHU के शोध में एसएसपीई मरीजों में हृदय जटिलताओं का खुलासा

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वाराणसी। आइएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण अध्ययन के जरिए घातक दिमागी बीमारी सबएक्यूट स्क्लेरोसिंग पेनेंसेफलाइटिस (एसएसपीई) से ग्रसित मरीजों में हृदय संबंधी गंभीर जटिलताओं की आशंका को उजागर किया है। इस शोध ने वैश्विक स्तर पर चिकित्सकों और वैज्ञानिकों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है।

खसरे के वायरस से उत्पन्न यह बीमारी जहां एक ओर मस्तिष्क को प्रभावित कर उसे धीरे-धीरे निष्क्रिय करती है, वहीं दूसरी ओर यह हृदय की धड़कनों को भी असामान्य बना सकती है। एसएसपीई एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, जो प्रायः बच्चों और किशोरों में पाया जाता है। इसका वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के उन हिस्सों को प्रभावित करता है, जो शरीर की स्वायत्त प्रणाली को नियंत्रित करते हैं।

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यह स्वायत्त प्रणाली सीधे तौर पर हृदय की धड़कनों से जुड़ी होती है, लेकिन उपचार के दौरान इस पहलू को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। प्रो. दीपिका जोशी के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में अक्टूबर 2025 तक के वैश्विक आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण किया गया, जिसमें कुल 947 शोध पत्रों को शामिल किया गया। हृदय गति में अंतर को समझने के लिए सांख्यिकीय विधि मेटा-एनालिसिस का सहारा लिया गया।

शोध के निष्कर्षों ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। इसमें पाया गया कि एसएसपीई से पीड़ित मरीजों की हृदय गति सामान्य बच्चों की तुलना में औसतन 11.20 बीट प्रति मिनट अधिक होती है। स्वायत्त तंत्र में गड़बड़ी के चलते इन मरीजों में हृदय की लय प्रभावित होने के शुरुआती संकेत भी मिले हैं। साथ ही हृदय गति की परिवर्तनशीलता में कमी दर्ज की गई, जो हृदय पर बढ़ते दबाव का संकेत मानी जा रही है।

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