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धर्म-कर्म

मंगलवार और पूर्णिमा का योग आज

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दान-पुण्य के साथ ही मंगल ग्रह की करें भात पूजा, हनुमान जी को चढ़ाएं सिंदूर और शिवलिंग पर करें चंदन का लेप

आज (मंगलवार, 26 दिसंबर) अगहन मास की पूर्णिमा यानी दत्त जयंती है। मंगलवार को पूर्णिमा होने से इस दिन मंगल ग्रह के लिए भी विशेष पूजा-पाठ करनी चाहिए। जिन लोगों की कुंडली में मंगल से जुड़े दोष हैं, उन्हें मंगलवार को मंगल की भात पूजा करनी चाहिए।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, मंगल ग्रह को भूमि पुत्र माना जाता है। इस ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। मंगल का जन्म स्थान उज्जैन है, इस वजह से यहां इस ग्रह से संबंधित पूजा खासतौर पर होती है। मंगलवार और पूर्णिमा के योग में मंगल ग्रह के लिए भात पूजा करनी चाहिए। इस पूजा में शिवलिंग का श्रृंगार पके हुए भात यानी चावल से किया जाता है। श्रृंगार के बाद भगवान की विधिवत पूजा की जाती है।

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अगहन पूर्णिमा पर कर सकते हैं ये शुभ काम

पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। इस तिथि पर तीर्थ यात्रा करनी चाहिए। किसी पौराणिक महत्व वाले मंदिर में दर्शन और पूजन करना चाहिए। अगर नदी स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो घर पर ही पानी में थोड़ा सा गंगा जल मिलाकर सभी पवित्र नदियों का ध्यान करते हुए स्नान कर सकते हैं। ऐसे स्नान करने से भी तीर्थ स्नान के समान पुण्य मिल सकता है।
पूर्णिमा पर सूर्य देव को अर्घ्य दें। तांबे के लोटे में जल के साथ कुमकुम, फूल और चावल भी डालें और सूर्य को चढ़ाएं। लोटे से गिरती हुई जल धारा से सूर्य देव का दर्शन करना चाहिए।
घर के मंदिर में गणेश पूजा करें। इसके बाद बाल गोपाल का दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें। शंख में दूध भरें और भगवान को चढ़ाएं। स्वच्छ जल से भगवान का अभिषेक करें। भगवान का श्रृंगार करें। फूल, वस्त्र और आभूषण अर्पित करें। माखन-मिश्री का भोग तुलसी के साथ लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। पूजा के बाद प्रसाद वितरित करें और खुद भी ग्रहण करें।
हनुमान जी की प्रतिमा पर सरसों के तेल और सिंदूर से चोला चढ़ाएं। श्रृंगार करें। हार-फूल अर्पित करें और धूप-दीप जलाएं। मौसमी फल और मिठाई का भोग लगाएं। हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें।
पूर्णिमा पर शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं और ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें। शिवलिंग पर चंदन का लेप करें। बिल्व पत्र, धतुरा, आंकड़े के फूल, जनेऊ, चंदन आदि चीजें चढ़ाकर पूजा करें। धूप-दीप जलाएं, मिठाई का भोग लगाएं।
किसी गौशाला में धन और हरी घास का दान करें। जरूरतमंद लोगों को गर्म वस्त्र, जूते-चप्पल और अनाज का दान करें। किसी मंदिर में पूजन सामग्री दान करें।

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