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गाजीपुर

स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों की नींद उड़ाने वाले थे डा. ब्रजनाथ सहाय

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बहरियाबाद की शान रहे शिक्षाविद् एवं समाजसेवी डा. ब्रजनाथ सहाय की 11वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि, जीवनभर निःशुल्क चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में किया सेवा कार्य

बहरियाबाद (गाजीपुर)। नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अपना आदर्श मानकर स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले बहरियाबाद निवासी शिक्षाविद्, समाजसेवी एवं सुभाष विद्या मंदिर इंटर कालेज व डिग्री कालेज के संस्थापक डा. ब्रजनाथ सहाय की 11वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। उनका पूरा जीवन देश, समाज, शिक्षा और चिकित्सा सेवा के लिए समर्पित रहा।

डा. ब्रजनाथ सहाय का जन्म 30 जून 1925 को हुआ था। वर्ष 1942 में महज 17 वर्ष की आयु में उन्होंने पद्मनाथ सिंह के नेतृत्व में आजमगढ़ में स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके साथ पुरुषोत्तम दास अंगूरिया, जूठन सिंह आदि भी आंदोलन में शामिल थे। बताया जाता है कि टीम के सदस्य प्रतिबंधित ‘रणभेरी’ पत्रिका चोरी-छिपे बेचकर लोगों में आजादी का जोश भरते थे।

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ब्रजनाथ सहाय ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ कई साहसिक गतिविधियों में भाग लिया। जब पद्मनाथ सिंह आजमगढ़ जेल में बंद थे, तब ब्रजनाथ सहाय ने जेल के गेट पर बम विस्फोट किया और रातोंरात पैदल बहरियाबाद पहुंच गए। इसके बाद तत्कालीन कोतवाल ढाकन सिंह ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया। वर्ष 1942 में ही उन्होंने कलेक्ट्रेट और एसपी कार्यालय के बीच लगे टेंट में रात के अंधेरे में पहुंचकर आग लगा दी और वहां से फरार हो गए। ब्रिटिश पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी। इसी कारण उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का सरकारी दर्जा भी नहीं मिल पाया।

इसी दौर में सादात थाना कांड के बाद ब्रजनाथ सहाय के नेतृत्व में बहरियाबाद में जबर्दस्त तिरंगा जुलूस निकाला गया था। अंग्रेज अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार करने के कई प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली।

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देश की आजादी के बाद भी उनका समाजसेवा का सिलसिला जारी रहा। 1960 के दशक में उन्होंने क्षेत्र में होम्योपैथिक चिकित्सालय की स्थापना की। जीवन के अंतिम समय तक सर्प और कुत्ते के काटने, फोड़े सहित विभिन्न रोगों से पीड़ित हजारों लोगों का निःशुल्क उपचार कर उन्हें राहत प्रदान की।

शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान भी उल्लेखनीय रहा। वर्ष 1945 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद उन्होंने वर्ष 1956 में आगरा विश्वविद्यालय से अंग्रेजी विषय में परास्नातक किया और एलटी की उपाधि प्राप्त की। अंग्रेजी के साथ वह उर्दू और फारसी के भी जानकार थे तथा साहित्य में उनकी गहरी रुचि थी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर उन्होंने 20 जनवरी 1948 को बहरियाबाद में सुभाष विद्या मंदिर इंटर कालेज की स्थापना की। विद्यालय का शिलान्यास तत्कालीन जिला परिषद के चेयरमैन लक्ष्मी नारायण पाण्डेय ने किया था। डा. सहाय वर्ष 1986 तक प्रधानाचार्य तथा जीवनभर प्रबंधक रहे। आज यह संस्थान क्षेत्र के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में शामिल है।

चुनाव लड़े, समाजसेवा को बनाया जीवन का उद्देश्य

डा. ब्रजनाथ सहाय ने वर्ष 1952 में विधानसभा का चुनाव भी लड़ा, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली और उनकी जमानत जब्त हो गई। बाद में वह सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े और अपने प्रिय शिष्य कालीचरण यादव को विधानसभा चुनाव लड़ाया, जो आगे चलकर उत्तर प्रदेश सरकार में शिक्षा मंत्री बने। डा. सहाय करीब 40 वर्षों तक गांव के सरपंच और प्रधान रहे। उन्होंने ब्लाक प्रमुख का चुनाव भी लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली।

उनका निधन 5 अक्टूबर 2015 को गाजीपुर में हुआ। पुण्यतिथि के अवसर पर संस्थान के प्रबंधक अजय सहाय, प्रधानाचार्य राम प्रकाश राम, आशीष सहाय, बदरुद्दीन शास्त्री, राजेश सिंह उर्फ बब्बू, अमित सहाय, उपेंद्र सिंह, आलोक सिंह, राजू सिंह, हरिश्चंद्र गुप्ता, राम पलट यादव, निसार फैज, हैदर अब्बास, राम प्यारे प्रजापति, गुलाब गुप्ता सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक, शिक्षक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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