गोरखपुर
2012 के लूट मामले में अभियुक्त को सात वर्ष की सजा, 10 हजार रुपये जुर्माना
गोरखपुर। वर्ष 2012 में थाना राजघाट में दर्ज लूट के एक मामले में लंबे समय बाद न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी अभियुक्त पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस के ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ अभियान के तहत प्रभावी पैरवी का परिणाम है।
पुलिस के मुताबिक राजघाट थाने में वर्ष 2012 में मुकदमा अपराध संख्या 332/2012, धारा 392 भादवि के तहत लूट का मामला दर्ज किया गया था। मामले में सुनील हरिजन पुत्र श्यामदेव, निवासी डोहरिया बाजार, थाना चिलुआताल, गोरखपुर को अभियुक्त बनाया गया था।
मामले की सुनवाई एएसजे/ईसी एक्ट न्यायालय, गोरखपुर में हुई। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी पाया। इसके बाद न्यायालय ने उसे सात वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
पुलिस के अनुसार मामले की लगातार मॉनिटरिंग वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर के निर्देशन में संबंधित थाने के पैरोकार और मॉनिटरिंग सेल द्वारा की गई। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
पुलिस ने बताया कि ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ के तहत पुराने और गंभीर आपराधिक मामलों में प्रभावी पैरवी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उद्देश्य साक्ष्यों और दस्तावेजों को न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर मामलों में दोषसिद्धि सुनिश्चित कराने की दिशा में काम करना है।
पुलिस के अनुसार अभियुक्त की दोषसिद्धि में एसपीपी धीरेन्द्र जायसवाल और एसपीपी सतीश चन्द्र यादव की पैरवी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके अलावा थाने के पैरोकार और मॉनिटरिंग सेल ने भी मामले की निगरानी करते हुए पैरवी में सहयोग किया।
