भदोही
सीईपीसी के इंडिया कार्पेट एक्सपो के स्टॉल रेट पर निर्यातकों में नाराजगी
50वें गोल्डन जुबली एक्सपो में छोटे और मझोले निर्यातकों की भागीदारी पर संकट, स्टॉल दर कम करने की मांग
भदोही। कालीन नगरी भदोही में कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) की ओर से 4 से 7 अक्टूबर तक 50वें इंडिया कार्पेट एक्सपो गोल्डन जुबली का आयोजन किया जा रहा है। भदोही कार्पेट एक्सपो मार्ट में होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय मेले की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन स्टॉल रेट को लेकर निर्यातकों की नाराजगी बरकरार है। निर्यातकों का कहना है कि अधिक स्टॉल दर के कारण छोटे और मझोले निर्यातक मेले में भाग लेने से वंचित हो रहे हैं।
निर्यातकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सीईपीसी चुनाव के दौरान परिषद के लिए चुने गए सदस्यों ने उद्योग हित में कई दावे और वादे किए थे। उम्मीद थी कि कालीन उद्योग से जुड़ी समस्याओं को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जाएगा और अंतरराष्ट्रीय मेलों में अधिक से अधिक निर्यातकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्टॉल दरों में राहत दी जाएगी। हालांकि, उनका आरोप है कि स्टॉल रेट कम करने के बजाय बढ़ा दिया गया है।
ईपीसीएच के मेले से भी अधिक रेट का दावा
निर्यातकों का कहना है कि सीईपीसी द्वारा निर्धारित स्टॉल रेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स (ईपीसीएच) के आयोजित मेलों की तुलना में भी अधिक बताया जा रहा है। उनका तर्क है कि ईपीसीएच को मेले के लिए बाहर से आयोजन स्थल किराये पर लेना पड़ता है, जबकि सीईपीसी के पास भदोही में अपना कार्पेट एक्सपो मार्ट उपलब्ध है।
निर्यातकों के अनुसार उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार की ओर से सीईपीसी को ग्रांट भी दी जाती है। ऐसे में उनका कहना है कि परिषद के पास अपना परिसर और सरकारी सहयोग होने के बावजूद स्टॉल दर अधिक रखना छोटे निर्यातकों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।
छोटे निर्यातकों पर बढ़ा आर्थिक दबाव
निर्यातकों का कहना है कि बड़े कारोबारी अधिक कीमत देकर स्टॉल बुक करा पाने की स्थिति में हैं, लेकिन सीमित संसाधनों वाले छोटे और मझोले निर्यातकों के लिए यह खर्च उठाना मुश्किल है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस महत्वपूर्ण मेले में उनकी भागीदारी प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लगातार एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने और छोटे उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की बात करती है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कालीन मेले में स्टॉल की अधिक लागत छोटे निर्यातकों के उद्देश्य के विपरीत मानी जा रही है।
निर्यातकों ने सीईपीसी से स्टॉल दरों की समीक्षा कर उन्हें कम करने की मांग की है, ताकि अधिक संख्या में छोटे और मझोले निर्यातक एक्सपो में हिस्सा ले सकें और भदोही के कालीन उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में और मजबूत पहचान मिल सके।
