वाराणसी
छह महीने से थमे थे कदम, ट्यूमर निकला तो 76 की मालती देवी फिर चलने को तैयार
फीमर में ट्यूमर के कारण चलने में थीं असमर्थ, सफल मेगाप्रोस्थेसिस सर्जरी के बाद वॉकर के सहारे चलने की कोशिश
ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. रतन गुप्ता ने किया ऑपरेशन, टाइटेनियम फीमर इम्प्लांट लगाया
वाराणसी। छह महीने से चलने में असमर्थ 76 वर्षीय मालती देवी के लिए सफल सर्जरी के बाद एक बार फिर चलने की उम्मीद जगी है। आजमगढ़ निवासी मालती देवी के बाएं पैर की जांघ की हड्डी (फीमर) में ट्यूमर होने के कारण वह लंबे समय से चल नहीं पा रही थीं। वाराणसी के शुभम हॉस्पिटल में ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. रतन गुप्ता ने उनकी सफल सर्जरी की।
जांच में एनकॉन्ड्रोमा ट्यूमर की पुष्टि
डॉ. रतन गुप्ता के अनुसार जांच और बायोप्सी के बाद मालती देवी के फीमर में एनकॉन्ड्रोमा ट्यूमर पाया गया। मरीज की उम्र और हड्डी की स्थिति को देखते हुए मेगाप्रोस्थेसिस सर्जरी करने का निर्णय लिया गया।
ट्यूमर निकालकर लगाया टाइटेनियम इम्प्लांट
ऑपरेशन के दौरान फीमर के ऊपरी हिस्से के करीब एक-तिहाई भाग में मौजूद ट्यूमर को निकाल दिया गया। इसके बाद प्रभावित हिस्से के स्थान पर टाइटेनियम का फीमर इम्प्लांट लगाया गया। डॉ. गुप्ता ने बताया कि ऑपरेशन 10 अगस्त को किया गया था।
ऑपरेशन के अगले दिन बैठाया
सर्जरी के अगले ही दिन मालती देवी को बैठाया गया। अब उन्हें वॉकर की मदद से चलाने का प्रयास किया जा रहा है। करीब छह महीने तक चलने में असमर्थ रहीं मालती देवी ने ऑपरेशन के बाद डॉक्टर के पूछने पर कहा कि उन्हें “बढ़िया लग रहा है।”
डॉ. गुप्ता ने बताया कि ऐसे मामलों में मरीज की उम्र, हड्डी की स्थिति और ट्यूमर की प्रकृति के आधार पर उपचार की योजना बनाई जाती है। सफल सर्जरी के बाद मरीज को जल्द से जल्द सामान्य गतिविधियों की ओर ले जाना उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
