भदोही
जलधारा के साथ शिवलिंग पर चढ़ाएं बेलपत्र, पूरी होगी मनोकामना
सावन का दूसरा सोमवार आज, शिव आराधना के लिए मंदिरों में उमड़ेगा आस्था का सैलाब
बेलपत्र अर्पित करने के बताए नियम, सोमवार को बेलपत्र तोड़ना माना गया वर्जित
ज्ञानपुर। सावन मास का दूसरा सोमवार आज है। भगवान शिव को समर्पित सावन महीने में सोमवार का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित कर विधि-विधान से पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
विनय कुमार मिश्र के अनुसार, सावन मास भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना गया है। इस दौरान सोमवार का व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। शिवपुराण में भी सावन में श्रद्धापूर्वक भगवान शंकर की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
शिवलिंग पर जलधारा के साथ चढ़ाएं बेलपत्र
भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय माना जाता है। पूजा के दौरान बेलपत्र के साथ जल की धारा अर्पित करने की परंपरा है। बेलपत्र की तीन पत्तियों वाला पत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है। कटी-फटी पत्तियां अर्पित नहीं करनी चाहिए।
बेलपत्र चढ़ाते समय चिकनी सतह को शिवलिंग की ओर रखते हुए अर्पित करने की मान्यता है। इसे अनामिका, अंगूठे और मध्यमा अंगुली की सहायता से चढ़ाने की परंपरा बताई गई है।
सोमवार को बेलपत्र तोड़ना वर्जित
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या, संक्रांति और सोमवार को बेलपत्र तोड़ना वर्जित माना गया है। ऐसे में श्रद्धालु एक दिन पहले बेलपत्र तोड़कर रख सकते हैं। मान्यता है कि बेलपत्र अशुद्ध नहीं होता और पहले भगवान शिव को अर्पित किया गया बेलपत्र भी धोकर दोबारा चढ़ाया जा सकता है।
सावन के दूसरे सोमवार को मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
