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वाराणसी

एचआईवी नियंत्रण में वाराणसी को बड़ी उपलब्धि

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प्रदेश का पहला ‘सक्षम’ जनपद बना

नाको के 95-95-99 मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन, एड्स नियंत्रण कार्यक्रम में मिली राष्ट्रीय पहचान

वाराणसी। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के 95-95-99 वैश्विक लक्ष्यों पर आधारित मूल्यांकन में वाराणसी उत्तर प्रदेश का पहला और एकमात्र ‘सक्षम’ (Saksham) जनपद घोषित किया गया है। नाको की जिला-वार रैंकिंग में वाराणसी ने तीन में से दो प्रमुख मानकों को पूरा कर यह उपलब्धि हासिल की है।

नाको के अनुसार, एक मानक पूरा करने वाले जिले को ‘संघर्षशील’, दो मानक हासिल करने वाले को ‘सक्षम’ और तीनों मानक पूरे करने वाले को ‘सुरक्षित’ श्रेणी में रखा जाता है। वाराणसी ने प्रथम और तृतीय मानक पूरे करते हुए ‘सक्षम’ श्रेणी में स्थान बनाया है।

95-95-99 लक्ष्य के तहत पहला उद्देश्य एचआईवी संक्रमित अनुमानित आबादी के कम से कम 95 प्रतिशत लोगों को अपनी संक्रमण स्थिति की जानकारी होना, दूसरा 95 प्रतिशत संक्रमितों को एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) से जोड़ना और तीसरा उपचाररत 99 प्रतिशत मरीजों में वायरल लोड को इतना कम करना है कि संक्रमण फैलने का जोखिम नगण्य हो जाए।

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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार ने इस सफलता का श्रेय स्वास्थ्य विभाग, उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी (UPSACS), आईसीटीसी, एआरटी सेंटर, डीएसआरसी, ओएसटी सेंटर, लक्षित हस्तक्षेप परियोजनाओं, सामुदायिक संगठनों और कार्यक्रम से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के संयुक्त प्रयासों को दिया।

जिला क्षय रोग अधिकारी एवं दिशा प्रभारी डॉ. पीयूष राय ने बताया कि नई नाको गाइडलाइन के अनुसार राज्यों और जिलों का मूल्यांकन किया गया। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी के निर्देशन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी की प्रभावी मॉनिटरिंग में सभी विभागों के समन्वित प्रयासों से वाराणसी को यह विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त हुई है।

उन्होंने कहा कि ‘सक्षम’ श्रेणी में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि जनपद में एचआईवी रोकथाम, जांच, उपचार, परामर्श और सामुदायिक सहभागिता की सेवाएं प्रभावी ढंग से संचालित हो रही हैं। यह उपलब्धि न केवल वाराणसी बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

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