बलिया
स्वतंत्रता सेनानियों की आवंटित जमीन से कब्जा हटाने की उठी मांग, डीएम को सौंपा ज्ञापन
बलिया के सेनानी परिवारों ने ऊधम सिंह नगर में कथित अवैध कब्जों की जांच और भूमि वापस दिलाने की मांग की, कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी
सेनानी परिवारों ने उठाई न्याय की मांग
बलिया/ऊधम सिंह नगर। वर्ष 1950 में बलिया के स्वतंत्रता सेनानियों को उत्तराखंड के वर्तमान ऊधम सिंह नगर जनपद में आवंटित कृषि भूमि की खोज, सत्यापन और उस पर कथित अवैध कब्जे हटाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। पूर्वांचल जनता दल के अध्यक्ष भरत यादव के नेतृत्व में सेनानी परिवारों के प्रतिनिधिमंडल ने ऊधम सिंह नगर के जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मामले में कार्रवाई की मांग की।
भूमि पर अवैध कब्जे का लगाया आरोप
प्रतिनिधिमंडल का दावा है कि वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत की पहल पर वर्ष 1950 में कृषि भूमि आवंटित की गई थी। आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही और स्थानीय परिस्थितियों के कारण अधिकांश सेनानी भूमि पर कब्जा नहीं ले सके और बाद में उस पर भू-माफिया ने कथित रूप से कब्जा कर लिया।
जांच और कार्रवाई की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने इसे गंभीर भूमि घोटाला बताते हुए प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तथा पात्र सेनानी परिवारों को उनकी भूमि का अधिकार दिलाने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो सेनानी परिवार आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।
डीएम ने दिया जांच का आश्वासन
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, जिलाधिकारी ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि जल्द ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर इस संबंध में विस्तृत प्रतिवेदन सौंपा जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल में अधिवक्ता प्रेम कुमार तिवारी, संजय सिंह, गुड्डू गुप्ता, अनिल कुमार सिंह सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
