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वाराणसी

14 दिन बाद नवयौवन रूप में दर्शन देंगे भगवान जगन्नाथ

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15 जुलाई को निकलेगी भव्य डोली यात्रा, पहले दिन गरुड़ मंदिर निर्माण का होगा शुभारंभ; प्लास्टिक मुक्त रहेगा मेला परिसर

108 ध्वजों के साथ निकलेगी शोभायात्रा, लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत को प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट की तैयारियां पूरी

वाराणसी। काशी के ऐतिहासिक भगवान जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 14 दिनों के अनवसर (विश्राम) के बाद भगवान जगन्नाथ 14 जुलाई को नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे। इस अवसर पर प्रभु का श्वेत वस्त्रों में विशेष श्रृंगार किया जाएगा तथा स्वास्थ्य लाभ की परंपरा के उपरांत उन्हें परवल के जूस, परवल की मिठाई सहित विभिन्न व्यंजनों का भोग अर्पित किया जाएगा। श्रद्धालु सुबह मंगला आरती से लेकर रात नौ बजे शयन आरती तक नवयौवन रूप के दर्शन कर सकेंगे।

मंदिर के पुजारी पंडित राधेश्याम पांडेय ने बताया कि अनवसर काल के दौरान भगवान के स्वास्थ्य लाभ की परंपरा निभाई जाती है। इसके बाद नवयौवन दर्शन के दिन विशेष श्रृंगार के साथ पहली बार भक्तों को प्रभु के दर्शन कराए जाते हैं। इस अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

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15 जुलाई को निकलेगी भव्य डोली यात्रा

15 जुलाई को भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भव्य डोली यात्रा पर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे। सुबह मंगला आरती और श्रृंगार के बाद दोपहर तक दर्शन होंगे। दोपहर तीन बजे विशेष आरती के पश्चात डोली यात्रा प्रारंभ होगी, जो शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए शाम करीब साढ़े पांच बजे रथयात्रा स्थित बेनीराम बाग पहुंचेगी। यहां रथ एवं भगवान का विधि-विधान से पूजन होगा और इसी के साथ रथयात्रा मेले का धार्मिक शुभारंभ माना जाएगा।

108 ध्वजों के साथ निकलेगी शोभायात्रा

इस वर्ष की डोली यात्रा कई विशेषताओं से युक्त होगी। भगवान जगन्नाथ को मलमल के वस्त्रों से सुसज्जित डोली में विराजमान किया जाएगा। डमरू दल की मंगल ध्वनि के बीच श्रद्धालु 108 ध्वज लेकर शोभायात्रा का नेतृत्व करेंगे। पहली बार पुरी शंकराचार्य की परंपरा के अनुसार पुरी पीठ की वाराणसी शाखा के साधु-संत गंगाजल से डोली की शुद्धि कर पुष्पवर्षा करेंगे। परंपरा के अनुसार आठ कहार डोली को अपने कंधों पर लेकर यात्रा संपन्न कराएंगे।

16 जुलाई से शुरू होगा तीन दिवसीय रथयात्रा मेला

16 जुलाई से काशी का ऐतिहासिक तीन दिवसीय रथयात्रा मेला शुरू होगा। मेले में लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचेंगे। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ पारंपरिक मेले की रौनक भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन, मंदिर ट्रस्ट और नगर निगम ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।

प्लास्टिक मुक्त रहेगा मेला परिसर

नगर निगम ने इस वर्ष रथयात्रा मेला क्षेत्र को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त घोषित किया है। मेला परिसर में दुकान लगाने वाले सभी दुकानदारों को प्लास्टिक का उपयोग न करने संबंधी शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा। शपथ पत्र देने के बाद भी यदि कोई दुकानदार प्लास्टिक का प्रयोग करता पाया गया तो उसके खिलाफ जुर्माने सहित नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए विशेष निगरानी व्यवस्था भी बनाई गई है।

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मेले के पहले दिन शुरू होगा गरुड़ मंदिर निर्माण

रथयात्रा महोत्सव के पहले दिन मंदिर परिसर में भगवान गरुड़ के भव्य मंदिर निर्माण का शुभारंभ भी होगा। ट्रस्ट श्री जगन्नाथ जी के सचिव शैलेश त्रिपाठी ने बताया कि मंदिर निर्माण के लिए राजस्थान के धौलपुर से विशेष पत्थरों की पहली खेप वाराणसी पहुंच चुकी है। इन्हीं पत्थरों से भगवान गरुड़ का भव्य मंदिर बनाया जाएगा। ट्रस्ट के अनुसार रथयात्रा महोत्सव के साथ इस निर्माण कार्य की शुरुआत धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नवयौवन दर्शन, भव्य डोली यात्रा, तीन दिवसीय ऐतिहासिक रथयात्रा मेला, प्लास्टिक मुक्त आयोजन और गरुड़ मंदिर निर्माण की शुरुआत इस वर्ष के महोत्सव को श्रद्धालुओं के लिए और अधिक विशेष एवं यादगार बनाएगी।

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