Connect with us

गाजीपुर

सरकारी स्कूलों से क्यों घट रहा नामांकन?

Published

on

Loading...
Loading...

अंग्रेजी माध्यम का बढ़ता आकर्षण या शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियां, अभिभावकों के सामने बड़ा सवाल

विशेषज्ञ बोले— शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मिले राहत, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और जवाबदेही से लौटेगा विश्वास

गाजीपुर। कोरोना महामारी के दौरान आर्थिक संकट के कारण बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों का दाखिला सरकारी विद्यालयों में कराया था। उस समय निजी विद्यालयों की फीस वहन करना कई परिवारों के लिए कठिन हो गया था। लेकिन जैसे-जैसे आर्थिक स्थिति सामान्य हुई, वैसे-वैसे अनेक अभिभावकों ने अपने बच्चों को फिर से निजी विद्यालयों में भेजना शुरू कर दिया। इसका असर सरकारी विद्यालयों के नामांकन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावकों का मानना है कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी दौर में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा, नियमित पढ़ाई, अनुशासन और विद्यार्थियों पर व्यक्तिगत ध्यान जैसी सुविधाएं उन्हें निजी विद्यालयों की ओर आकर्षित करती हैं। दूसरी ओर सरकारी विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा, पुस्तकें, यूनिफॉर्म और मध्याह्न भोजन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर अपेक्षित भरोसा नहीं बन पा रहा है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में घटते नामांकन के लिए केवल अंग्रेजी माध्यम का आकर्षण जिम्मेदार नहीं है। शिक्षकों को शिक्षण कार्य के अलावा मतदाता सूची पुनरीक्षण, जनगणना, चुनाव ड्यूटी, विभिन्न सरकारी सर्वेक्षण, योजनाओं के सत्यापन और अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगातार लगाया जाता है। इन गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों के कारण उनका पर्याप्त समय कक्षाओं में नहीं लग पाता, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

Advertisement

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षकों को अधिकतम समय केवल शिक्षण कार्य के लिए उपलब्ध कराया जाए, विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अंग्रेजी और तकनीकी दक्षता पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा अभिभावकों का विश्वास मजबूत किया जाए, तो सरकारी विद्यालय एक बार फिर छात्रों की पहली पसंद बन सकते हैं।

शिक्षाविदों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों को केवल सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें उत्कृष्ट शिक्षण का केंद्र बनाया जाना चाहिए। साथ ही शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ कम कर उन्हें बच्चों की शिक्षा पर पूरी तरह केंद्रित होने का अवसर दिया जाए और उनकी शैक्षणिक जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस गंभीर विषय पर सरकार, शिक्षा विभाग और शिक्षाविद समय रहते व्यापक मंथन कर ठोस कदम नहीं उठाते हैं, तो शिक्षा पर होने वाले भारी सरकारी निवेश के बावजूद अपेक्षित परिणाम प्राप्त करना कठिन होगा। सरकारी विद्यालयों में घटते नामांकन की प्रवृत्ति को रोकने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अभिभावकों का विश्वास दोनों को समान रूप से मजबूत करना समय की आवश्यकता है।

Copyright © 2024 Jaidesh News. Created By Hoodaa

You cannot copy content of this page