Connect with us

वाराणसी

‘फ्रेश मोमो’ और ‘नई गड्डी’ के कोड में फल-फूल रहा धंधा, पुलिस बेखबर

Published

on

Loading...
Loading...

व्हाट्सएप्प से हो रही डीलिंग, होटल छोड़ अब फ्लैट बने ठिकाना

वाराणसी। जिले में देह व्यापार के संचालन का तरीका अब बदलता नजर आ रहा है, जहां एजेंट खुले तौर पर बातचीत करने के बजाय कोड वर्ड का सहारा ले रहे हैं। ‘नई गड्डी’, ‘फ्रेश मोमो’ और ‘रजनीगंधा’ जैसे शब्दों के जरिए ग्राहकों से संपर्क साधा जा रहा है।

जांच के दौरान एक पत्रकार ने ग्राहक बनकर एक एजेंट से संपर्क किया। शुरुआती बातचीत में एजेंट ने सीधे मिलने से इनकार करते हुए अपने एक अन्य साथी का नंबर साझा किया। इसके बाद व्हाट्सएप्प कॉल और चैट के जरिए बातचीत आगे बढ़ी। एजेंट ने भरोसा दिलाया कि मांग के अनुसार युवतियां उपलब्ध कराई जाएंगी और लोकेशन बाद में भेज दी जाएगी। पूरी बातचीत में उसने कई कोड वर्ड का इस्तेमाल किया।

एक बातचीत में एजेंट ने सारनाथ क्षेत्र से बचने की सलाह देते हुए परेड कोठी इलाके का जिक्र किया और ‘रजनीगंधा’ शब्द का प्रयोग कर वीआईपी व्यवस्था का दावा किया। भेलूपुर में पूर्व में हुई कार्रवाई का जिक्र करने पर उसने बताया कि अब पेइंग गेस्ट हाउस के बजाय फ्लैट्स में काम किया जा रहा है। ‘नई गड्डी’ और ‘फ्रेश मोमो’ जैसे शब्दों के जरिए उसने अलग-अलग स्थानों की युवतियों का संकेत दिया और उनके लिए तय रकम की जानकारी दी। एजेंट ने यह भी कहा कि पहले व्हाट्सएप्प पर फोटो दिखाए जाते हैं, पसंद आने पर एडवांस भुगतान लिया जाता है, उसके बाद ही स्थान की जानकारी दी जाती है।

दूसरे मामले में एजेंट ने ‘नई गड्डी’ आने की बात कहकर बंगाल की युवती उपलब्ध कराने का दावा किया और इसके लिए 3500 रुपये की मांग की। कुछ राशि अग्रिम और बाकी मौके पर देने की बात कही गई। बातचीत के दौरान एजेंट ने चार युवतियों के फोटो भी भेजे, जिनकी उम्र लगभग 18 से 30 वर्ष के बीच बताई गई। मिलने के लिए हैदराबाद गेट के पीछे सुसवाही क्षेत्र में स्थित फ्लैट का जिक्र किया गया, जबकि होटल में पुलिस की सख्ती होने की बात कही गई।

Advertisement

जिले में भेलूपुर सर्किल इस अवैध गतिविधि का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। लंका, चितईपुर और दुर्गाकुंड समेत कई इलाकों में बीते पांच महीनों के भीतर चार स्थानों पर पुलिस कार्रवाई कर ऐसे मामलों का खुलासा कर चुकी है। इसके अलावा शहर के अन्य हिस्सों में भी इस तरह के नेटवर्क सामने आए हैं। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि इस धंधे के लिए पश्चिम बंगाल को प्रमुख स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। संबंधित लोग वहां से युवतियों को बुलाकर अधिक कमाई का लालच देकर इस अवैध गतिविधि में शामिल करते हैं। हाल ही में एसओजी-2 की कार्रवाई में भी बंगाल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई युवतियों के इस नेटवर्क से जुड़े होने की पुष्टि हुई थी।

Copyright © 2024 Jaidesh News. Created By Hoodaa

You cannot copy content of this page