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चन्दौली

सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन, सुदामा चरित्र ने किया भावविभोर

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पीडीडीयू नगर (चंदौली)। रस्तोगी गली स्थित एस.एम. कॉम्प्लेक्स में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन हृदयस्पर्शी सुदामा चरित्र की कथा के साथ हुआ। वृंदावन से पधारे पंडित श्याम मिलन शास्त्री जी ने कथा के सातवें और अंतिम दिन श्रोताओं को भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की अद्भुत कथा का रसास्वादन कराया।

कथा में बताया गया कि श्रीकृष्ण और सुदामा ने अपने गुरु संदीपन ऋषि के आश्रम में साथ शिक्षा ग्रहण की थी। एक प्रसंग में गुरु माता ने दोनों को लकड़ी लाने जंगल भेजा और सुदामा को दो मुट्ठी चने दिए। सुदामा जब चने खा रहे थे, तब श्रीकृष्ण ने मुस्कुराते हुए पूछा कि यह दांत बजने की आवाज क्यों आ रही है, जिस पर सुदामा ने ठंडक का बहाना बना दिया। किंतु उस घटना के फलस्वरूप सुदामा को जीवनभर गरीबी सहनी पड़ी।

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शास्त्री जी ने बताया कि संसार में दरिद्रता से बड़ा कोई दुख नहीं है और संतों के मिलन से बड़ा कोई सुख नहीं। कथा में सुदामा की धर्मपत्नी सुशीला का भी उल्लेख हुआ, जिन्होंने अपने गुण और धर्मशीलता से सुदामा को द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण से मिलने के लिए प्रेरित किया।

भावपूर्ण प्रस्तुतिकरण से वातावरण भक्ति रस में डूब गया और श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

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