वाराणसी
29 अक्टूबर को सजेगा चेतगंज का ऐतिहासिक नक्कटैया मेला, बदहाल सड़कों ने बढ़ाई चिंता
समिति ने प्रशासन से की मरम्मत की मांग, मुख्यमंत्री से आर्थिक सहायता की लगाई गुहार
वाराणसी। काशी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान चेतगंज का विश्व प्रसिद्ध नक्कटैया मेला 29 अक्टूबर को सजेगा। श्री चेतगंज रामलीला समिति की ओर से आयोजित होने वाले इस लक्खा मेले का इस वर्ष 140वां आयोजन होगा। मेले को भव्य बनाने के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन क्षेत्र की बदहाल सड़कें, क्षतिग्रस्त गलियां और जगह-जगह गड्ढे समिति के पदाधिकारियों की चिंता बढ़ा रहे हैं। समिति ने जिला प्रशासन और नगर निगम से मेले से पहले सड़कों एवं गलियों की मरम्मत कराने की मांग की है।
समिति के अध्यक्ष अजय गुप्ता (बच्चू) और वरिष्ठ उपाध्यक्ष महंत महेंद्र गिरि महाराज ने बताया कि लहुराबीर चौराहे से बेनियाबाग तिराहा, सेनपुरा, चेतगंज हनुमान मंदिर, चेतगंज चौराहा और पानदरीबा रोड तक सड़कों की स्थिति खराब है। कई गलियां भी क्षतिग्रस्त हैं। ऐसे में मेले में उमड़ने वाली भारी भीड़ को आवागमन में परेशानी हो सकती है। यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता बनी हुई है। पदाधिकारियों के अनुसार, पहले मेले से पूर्व प्रशासनिक अधिकारी क्षेत्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं दुरुस्त कराते थे, लेकिन इस बार अब तक अपेक्षित पहल नहीं हुई है।
समिति ने बताया कि हर वर्ष नगर निगम, जलकल और विद्युत विभाग की ओर से पेयजल के टैंकर, स्ट्रीट लाइट, जनरेटर और निर्बाध बिजली आपूर्ति की व्यवस्था की जाती रही है। इस बार भी इन व्यवस्थाओं को समय से पूरा कराने की मांग की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
अंग्रेजों के अत्याचार के विरोध में शुरू हुई थी नक्कटैया
चेतगंज का नक्कटैया मेला धार्मिक आयोजन के साथ ही सामाजिक और ऐतिहासिक महत्व भी रखता है। समिति के अनुसार, परमपूज्य बाबा फतेह राम जी ने अंग्रेजों के अत्याचारों के विरोध में लाग-विमान और स्वांग के माध्यम से जनजागरण के उद्देश्य से इसकी शुरुआत की थी। समय के साथ मेले का स्वरूप बदलता गया और आज भी इसके जुलूस में विभिन्न सामाजिक एवं राष्ट्रीय मुद्दों को प्रदर्शित करने का प्रयास किया जाता है। इस वर्ष इलाहाबाद, मिर्जापुर, जौनपुर, भदोही, ज्ञानपुर, जक्खिनी, आजमगढ़ और फूलपुर सहित कई क्षेत्रों से लाग-विमान आने की सूचना है।
मेले के दौरान पूरे क्षेत्र को राममय बनाने के लिए अग्रवाल रेडियो के माध्यम से रामधुन और भजनों का प्रसारण किया जाता है। सत्ती माई मंदिर स्थित सूचना प्रसारण केंद्र से भी व्यवस्थाएं संचालित की जाती हैं। परंपरा के अनुसार, मेले का उद्घाटन रात्रि 12 बजे चेतगंज थाने के सामने जिलाधिकारी द्वारा किया जाता है।
समिति की जमीन से कब्जा हटवाने की मांग
पत्रकार वार्ता में समिति ने अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर होने का हवाला देते हुए प्रदेश सरकार से मेले के आयोजन और विकास के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी सहयोग की अपील की। साथ ही सांसद निधि से मेले की व्यवस्थाओं के लिए अनुदान उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
समिति ने मोहल्ला बाग केशवानंद, जिसे बाग बरियार सिंह भी कहा जाता है, स्थित अपनी जमीन पर कथित अवैध कब्जे का मामला भी उठाया। पदाधिकारियों के मुताबिक, आराजी संख्या 1201, मकान संख्या सी के65/8 और लगभग 30 बिस्वा क्षेत्रफल वाली इस जमीन को लेकर न्यायालय में मुकदमेबाजी हुई है। समिति का दावा है कि सिविल जज वाराणसी के फैसले को प्रथम अपर जनपद न्यायाधीश ने भी पुष्ट किया है। इसके बावजूद जमीन के एक हिस्से पर कथित रूप से कब्जा कर तबेला संचालित किया जा रहा है। समिति ने आरोप लगाया कि जमीन खाली कराने के लिए अब तक उसे शासन-प्रशासन से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला है।
समिति के पदाधिकारियों ने पत्रकारों से भी मेले के क्षेत्र का निरीक्षण कर समस्याओं को प्रशासन के सामने रखने की अपील की, ताकि समय रहते व्यवस्थाएं दुरुस्त हो सकें और ऐतिहासिक नक्कटैया मेला शांतिपूर्ण एवं भव्य तरीके से संपन्न हो सके।
पत्रकार वार्ता में अध्यक्ष अजय गुप्ता, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महंत महेंद्र गिरि महाराज, राजू यादव, अजय सिंह ‘बॉबी’, तनुज पांडेय, रजत श्रीवास्तव, प्रदीप कुमार कन्नौजिया, आशु श्रीवास्तव सहित समिति के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
