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आजमगढ़

1857 की क्रांति के प्रणेता थे मंगल पांडेय : ब्रजेश नंदन पांडेय

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ब्राह्मण समाज कल्याण परिषद ने मनाई मंगल पांडेय की जयंती, चित्र पर किया माल्यार्पण

देश की आजादी के लिए मंगल पांडेय का योगदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा

आजमगढ़। ब्राह्मण समाज कल्याण परिषद के तत्वावधान में रविवार को एलवल स्थित शिविर कार्यालय पर महान क्रांतिकारी मंगल पांडेय की जयंती मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगल पांडेय के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ब्राह्मण समाज कल्याण परिषद के अध्यक्ष ब्रजेश नंदन पांडेय ने कहा कि मंगल पांडेय वर्ष 1857 की क्रांति के प्रमुख प्रणेता थे। उन्होंने कहा कि आजादी के महानायक मंगल पांडेय का जन्म 19 जुलाई 1827 को बलिया जनपद के नगवा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम दिवाकर पांडेय और माता का नाम अभय रानी था।

उन्होंने बताया कि मंगल पांडेय ईस्ट इंडिया कंपनी की बंगाल नेटिव इन्फेंट्री की 34वीं रेजिमेंट में सिपाही थे। अंग्रेजों की नीतियों, संदिग्ध कारतूसों के प्रयोग और भारतीय सैनिकों के साथ भेदभाव के विरोध में उन्होंने 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में विद्रोह का बिगुल फूंका और अंग्रेज अधिकारियों के खिलाफ संघर्ष करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन की नींव मजबूत की।

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मंगल पांडेय का बलिदान बना स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा

कार्यक्रम का संचालन करते हुए परिषद के महामंत्री मनोज कुमार त्रिपाठी ने कहा कि मंगल पांडेय ने अपने व्यक्तिगत सुखों का त्याग कर देश और धर्म की रक्षा के लिए अंग्रेजी शासन के विरुद्ध आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि मंगल पांडेय प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत और देशभक्त सिपाही के रूप में सदैव याद किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1857 में मंगल पांडेय द्वारा बोया गया क्रांति का बीज लगभग 90 वर्षों बाद 1947 में देश की स्वतंत्रता के रूप में विशाल वृक्ष बना।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्रजेश नंदन पांडेय ने की, जबकि संचालन महामंत्री मनोज कुमार त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर संरक्षक तारकेश्वर मिश्रा, गिरीश चतुर्वेदी, विश्व देव उपाध्याय, सतीश मिश्रा, सतीश कुमार पांडेय, गिरिजा सुवन पांडेय, उपेंद्र दत्त शुक्ला, गोविंद दुबे, राजन पांडेय, शशांक तिवारी, शिव सहाय पाठक सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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