वाराणसी
वैदिक रीति से हुआ श्वान का दाह संस्कार, ‘भैरव का स्वरूप’ मानकर दी गई अंतिम विदाई
वाराणसी। काशी के मणिकर्णिका घाट पर पहली बार एक पालतू श्वान के वैदिक रीति-रिवाजों से अंतिम संस्कार का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में काले/ब्राउन कलर के विदेशी नस्ल के श्वान ‘भद्रा’ का गंगा घाट पर अंतिम संस्कार करते हुए दिखाया गया है। इस घटना को लेकर लोगों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
बताया गया कि दूध विनायक क्षेत्र से जुड़े कन्नन स्वामी ने तीन दिन पहले इस पूरे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया संपन्न कराई। कन्नन स्वामी मूल रूप से केरल के निवासी हैं और लंबे समय से काशी में रहकर भगवान शिव की उपासना और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।
वायरल वीडियो में श्वान के शव को पहले गंगा में स्नान कराते हुए दिखाया गया। इसके बाद चंदन, दूध और पुष्पों से विधिवत पूजन किया गया। फिर शव को लाल वस्त्र में लपेटकर टिकठी पर रखा गया और नाव के माध्यम से मणिकर्णिका घाट ले जाया गया। घाट पर वैदिक परंपरा के अनुसार चिता सजाकर श्वान के शव को मुखाग्नि दी गई। दाह संस्कार की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद चिता की अग्नि को परंपरागत तरीके से शांत किया गया।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया गया है कि महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर पहली बार किसी श्वान का अंतिम संस्कार किया गया है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर बहस भी छिड़ी हुई है और लोग अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।
कन्नन स्वामी ने बताया कि भद्रा पिछले छह-सात वर्षों से उनके साथ रह रहा था और मंदिर परिवार का हिस्सा बन चुका था। उन्होंने कहा कि श्वान को भैरव का स्वरूप माना जाता है और वह मंदिर के धार्मिक आयोजनों में भी शामिल रहता था। उनके अनुसार भद्रा ने उनके साथ कई धार्मिक यात्राएं भी की थीं।
उन्होंने कहा कि काशी मोक्ष की नगरी मानी जाती है और यहां प्रत्येक जीवात्मा के प्रति सम्मान की भावना रखी जाती है। उनके अनुसार आत्मा हर जीव में ईश्वर के अंश के रूप में मौजूद होती है, इसलिए पशु-पक्षियों के प्रति भी श्रद्धा और संवेदना का भाव होना चाहिए।
स्थानीय लोगों के बीच भद्रा काफी लोकप्रिय था। उसके निधन के बाद मंदिर से जुड़े लोगों और आसपास के श्रद्धालुओं में शोक का माहौल देखा गया। यह घटना काशी की धार्मिक मान्यताओं और पशुओं के प्रति संवेदनशीलता को लेकर नई चर्चा का विषय बन गई है।
