भदोही
भोग और मोक्ष दोनों एक साथ देने वाले हैं कृष्ण : पं. प्रमोद
भागवत कथा के चौथे दिन कृष्ण के जीवन दर्शन की व्याख्या
भदोही/रैमलपुर। क्षेत्रीय गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन पं. प्रमोद शास्त्री ने कृष्ण के जीवन दर्शन और भागवत के सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सामान्यतः भोग और मोक्ष को एक-दूसरे से अलग माना जाता है, लेकिन श्रीमद्भागवत का दर्शन दोनों के बीच संतुलन का संदेश देता है।
कृष्ण शब्द के अर्थ की बताई व्याख्या
पं. प्रमोद शास्त्री ने कहा कि ‘कृष्ण’ शब्द ‘कृष्’ और ‘ण’ से मिलकर बना है। ‘कृष्’ का अर्थ सत्ता, संपत्ति और ऐश्वर्य तथा ‘ण’ का अर्थ निवृत्ति, निर्वाण और मोक्ष बताया। उन्होंने कहा कि इसी कारण कृष्ण भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करने वाले माने गए हैं।
भोग में आसक्ति न होने पर मुक्ति का मार्ग
कथावाचक ने कहा कि भागवत का सिद्धांत सांसारिक विषयों के भोग से पूरी तरह विमुख होने के बजाय उनमें रहते हुए निस्पृहता बनाए रखने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य भोगों के प्रति आसक्त नहीं है तो उसके लिए मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
कृष्ण के जीवन से समझाया निस्पृहता का संदेश
उन्होंने कृष्ण के जीवन प्रसंगों का उदाहरण देते हुए कहा कि वृंदावन में गोपियों के साथ रास, ग्वालों के साथ आनंद और माता यशोदा का दुलार उनके जीवन का हिस्सा रहा, लेकिन मथुरा आने के बाद उन्होंने पुनः उसी मोह में लौटकर नहीं देखा। उन्होंने कथा के माध्यम से ऐसे कई प्रसंगों और रहस्यों की व्याख्या की।
श्रद्धालु रहे मौजूद
कथा के दौरान मुख्य यजमान सहित ब्रह्मा सिंह, कैलाश मिश्रा, करुणाशंकर मिश्रा, वीरेंद्र पाठक समेत अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
