वाराणसी
दो दिवसीय एफपीओ प्रशिक्षण संपन्न, एनसीडीसी निदेशक ने बताए सफलता के सूत्र
8 जिलों के 28 एफपीओ प्रतिनिधियों ने लिया भाग, किसानों की आय बढ़ाने पर हुआ मंथन
वाराणसी। कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) टिकरी परिसर में आयोजित दो दिवसीय एफपीओ प्रशिक्षण कार्यक्रम रविवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के आठ जिलों से आए 28 एफपीओ के निदेशकों, सीईओ और अधिकारियों ने सहभागिता की।
एफपीओ के सशक्तीकरण और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
कार्यक्रम के संरक्षक अनिल सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य एफपीओ को अधिक प्रभावी बनाना तथा किसानों को बेहतर लाभ दिलाने के लिए आवश्यक जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करना था। प्रशिक्षण के दौरान एफपीओ संवर्धन, परियोजनाओं के विस्तार, गो संवर्धन, कृषि उत्पादों के वैल्यू एडिशन तथा लेखा-जोखा में पारदर्शिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
एनसीडीसी के क्षेत्रीय निदेशक ने साझा किए अनुभव
मुख्य अतिथि एनसीडीसी के क्षेत्रीय निदेशक संजय कुमार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) की योजनाओं का प्रभावी उपयोग कर एफपीओ को मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि संगठित प्रयासों और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से किसानों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।
किसानों को संगठित करने पर दिया जोर
एफपीओ निदेशक ई. अमित सिंह ने किसानों को एफपीओ से जोड़ने, उनके उत्पादों के संरक्षण तथा विपणन की बेहतर व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य तभी मिल सकता है जब वे संगठित होकर कार्य करें और आधुनिक कृषि प्रबंधन तकनीकों को अपनाएं।
प्रतिभागियों का जताया आभार
कार्यक्रम के समापन अवसर पर एफपीओ संरक्षक ने सभी प्रतिभागियों, विशेषज्ञों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से 50 एफपीओ के सीबीबीओ संजय सिंह के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से प्रशिक्षण कार्यक्रम को नई दिशा मिली है।
कई विशेषज्ञ और पदाधिकारी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में एनसीडीसी के डिप्टी डायरेक्टर आशुतोष शुक्ला, संरक्षक राम कुमार राय, मनोज कुमार, आरडी सिंह, आशुतोष श्रीवास्तव सहित कई एफपीओ निदेशक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने कृषक उत्पादक संगठन टिकरी द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए किसानों के हित में ऐसे कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
